गीत जांगड़ो देसाणराय रो

।।गीत – जांगड़ो।।

जंगल़ थप थांन विराजै जांमण
देवी आप देसांणै।
द्रढकर राज बैठायो दाता,
बीको पाट बीकांणै।।1

अरजन विजै जांगलू आख्यो,
चारण जोड चरावै।
धारै नाय रोफ धणियां रो,
करनी हांण करावै।।2

चरती धेन जोड में चारो,
मन व्रदावन मांनै।
आयो दुसट बैठ अस आसण,
करी दूठ तंग कांनै।।3

अकरम करण बोलियो ऊंधो,
रीत सनातन रेटी।
बीसहथी नै कैय विरोटण,
हठ चढियो कर हेठी।।4

भवा बोल कहियो मुख भ्राता,
चूंड चानणो चावो।
मोटम राख वंश रा मांझी,
थांन जांगलू ठावो।।5

वीरम चूंड जाणिया वीदग,
छता हथेल़ी छाला।
दीपै अंश वंश रो दीपक,
कुलल़ो बोलै काला!!6

मोनूं मती जाणजै मूरख,
दिगर रिड़मलै दांई!
लदलै आज अठै सूं लादो,
करनी समझूं कांई!!7

कहियो जदै कांन नै करनी,
अधप रीस मत आंणै।
वासो मास चार तो वासै,
जो लेसां सो जांणै।।8

दीदां हांण तनै तो दीसै,
भोल़ावण सुण भाई।
गाडी राख कैणै गजबंधी,
आयल करंड उठाई।।9

पचियो कांन पांणबल़ पाजी,
पेख हिल्ली ना पेटी।
जादूगरणी कह जांमण नै ,
मांम मछर में मेटी!!10

मांगी मोत मुखां निज मूरख,
चित परचो ओ चायो।
वधियो वाद कांन तिण विरियां,
गाढ भुजां गरबायो।।11

करनी लीक खांची निज कर सुं,
इण नै मूढ उथापै!
लगतै हाथ कांन जद लोपी
करगी नवलख कापै।।12

कीधो जाल़ पलट नै कांटो,
हर दिस में हरियाल़ी।
रोपी जेथ नेहड़ी राजी ,
दहि मथवा डाढाल़ी ।।13

चरणी सरस गायां नै चारो,
सेवण धांमण सारी।
पावै छाछ दही हद प्रागल़,
मोद करै महतारी।।14

वसुधा दिपै जेथ बोरड़ियां,
धोरड़ियां धणियांणी।
तारां चरै हरस तोरड़ियां,
कोड करै किनियांणी।।15

ओरण छबि जोड़ आंबां रै,
इल़ देसांणै ओपै।
पर्यावरण रुखाल़ण पाधर,
जोगण हाथां जोपै।।16

उथपै नहीं आंण तो आयल,
वसुधा सकल़ बतावै।
काटै नाय बोरड़ी कोई
काटै सो कटजावै।।17

ओरण इण राजै तूं अंबा,
नांमी नेस निराल़ै।
झाड़ां वास जिकण नै जांमण,
पाण राखनै पाल़ै।।18

चबदस कातिक तणी चानणी,
सगती तूझ सवाड़ो।
उतरै नवलख होय एकठी,
देवी रमण दिहाड़ो।।19

ओरण दरस अमर सह आवै,
देख कियां बिन देरी।
आवै उमड़ जातरी अणथग,
फल़दायक दे फेरी।।20

गिरधरदान जपै जस गढवी,
देख दासुड़ी वाल़ो।
जिणरै सदा तूठ नै जणणी,
तास विघन सह टाल़ो।।

~~गिरधर दान रतनू “दासोड़ी”

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