जीत रण बंका सिपाही! – कवि मोहन सिंह रतनू

आज संकट री घडी है।
देश पर विपदा पड़ी है।
कारगिल कश्मीर में,
कन्ट्रोल लाइन लडखड़ी है।
जुध रो बाजै नगारो।
सुण रह्यो संसार सारो।
दोस्ती री आड दुसमण,
पाक सेना अडबड़ी है।
सबक तूं इणनैं सिखावण,
जेज मत बीरा लगाई!
जीत रण बंका सिपाही!!
जूंझ रण बंका सिपाही!!

हिंद री पावन धरा है।
जोशमय जर्रा जर्रा है।
क्या कहे इंसान की कथ,
पशु पक्षी भी खरा है।
जोरवर हमीर जिसड़ै
भाटी से रणबांकुरा हैं।
आज भारत है अखंडम,
पाठ जग फिरसूं पढाई!
जीत रण बंका सिपाही!!
जूंझ रण बंका सिपाही!!

द्रास अर मद्रास तक री।
सुभ कामना साथ थारे।
बाटलिक रै बंकरां में,
रात- दिन हंसता बितारे।
बर्फ में बोफोर्स री झड़,
गड़गड़ाती गाज सुण कर,
देश हित मे सीस दीजै,
झांखजै मत फैर लारै,
फंफैड़ कर अरि फोजनैं
चुशूल तक करजै चढाई!!
जीत रण बंका सिपाही
जूंझ रण बंका सिपाही!!

~~मोहन सिंह रतनू
फोटो- अजीत सिह चारण कमांडो

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