जीवतै नै बोला दियो ! तो किसी इचरज री?

महाराजा मानसिंह जोधपुर,आपरी बगत रा महामनस्वी अर उदार नरेश हा।बै जितरा वीर अर अडर हा उतरा ई स्वाभिमानी। जितरा सहज हा उतरा ई संवेदनशील।महाराजा रै खास अर विश्वासी लोगां जद उणां रै साथै विश्वासघात अर छल़ कपट करणो शुरु कियो तो उणां नै इण रो अणूंतो खेद होयो।ऐड़ै समय में बै घणी वेल़ा गुमसुम हो ज्यावता तो घणी वेल़ा अबोला बैठा रैवता।ऐड़ै संक्रमण काल़ में एकर उणां सूं मिलण खातर अंग्रेज़ी सरकार रो एल ची अकबर अली आयो।महाराजा पागलपण रो नाटक करतां थकां गुमशुम अर अबोला बैठा रैया।नी तो उणां अकबर अली सूं मन री बात करी अर नी उणनै कूरब-कायदो।इण सूं अकबर अली नै रीस आई पण करै कांई?अंग्रेजी राज अर उणरै आदमी नै पूरो सम्मान नी मिलै आ बात उण दिनां खराखरी री ही। बो मन मार उठियो ई हो जितै भदोरै रा सांदू भोपाल़दानजी दरबार सूं मिलण आया ।आवतां ई उणां महाराजा नै ऐड़ी स्थिति में देखर आपरी ओजस्वी वाणी में हड़मान वाल़ो बल़ याद दिरावतां मानसिंहजी रै व्यक्तित्व रै अनुरूप एक दूहो पढियो-

नीम, थँभ केइ पाट नृप
छत कपाट के छज्झ।
धरम देवाल़य कल़श धज
धिनो मान कमधज्ज।।

इतरी सुणतां ई जाणै दीयै में तेल घातियो है!दरबार भोपाल़दानजी नै पूगतो सम्मान दियो।भोपाल़दानजी रै आवण सूं मानसिंहजी री बदल़ी मानसिक स्थिति नै देखर अकबर अली नै तमको आयग्यो अर उण कैयो ” ऐड़ी इण चारण कांई ओखद करी है कै दरबार बोलग्या अर इण सूं बतल़ करण लागग्या?अबार इयां लागै हो कै आप बीमार हो।” दरबार कैयो “सही है इण ओखद दीनी जिण रै पाण म्है में इतरो आपाण आयग्यो जिण सूं म्है म्हारी बीमारी पांतरग्यो।” ई भोपाल़दान म्हनै जीवतै नै बोला दियो तो किसी इचरज री बात है?इणरै बडेरै हूंफै तो भाटी दूदै रै कटियै माथै नै बोला दिय़ो हो।दरबार आप खुद एक दूहो कैयो

सांदू हूंफै सेवियो
साहब दुरजनसल्ल।
विड़छां माथो बोलियो
गीतां दूहां गल्ल।।

ई घर री वाणी ऐड़ी है कै सुणणियै में जोश आयां बिनां नीं रैय सकै।हूंफै रै गीतां नै सुणर कटियो माथो वाह !वाह! कैय सकै तो म्है तो अजै जीवतो हूं? इण रो दूहो सुणर कीकर बैठो रैय सकूं?”

अकबर अली मूंडो पिचकार र रैयग्यो।

सांदू भोपाल़दानजी स्वाभिमानी कवि अर निडर पुरुष हा जिणां रा मोकल़ा किस्सा प्रचलित है।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

 

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