जिण नैं मिलियो जय जंगल़धर पातसाह रो विरद

बीकानेर रो जूनो नाम जांगल अथवा जंगल। जद १५४५ में महावीर वीकै आपरै नाम सूं नगर थापियो तद सूं इण रो नाम बीकानेर।इण धरा रै सपूत राव जैतसी कामरान रा कांधा भांग कीरत लीनी। इणी जैतसी रै पोतै महाराजा रायसिंह आपरी उदारता रै पाण उण कवेसरां रै घरै हाथी बंधा दिया जिणां रै घरै बकरी बंधण रा सराजाम नीं हा। कवि रंगरेला वीठू रै सबदां में-

रायसिंघ नां जच्चियो पाधर रो पतसाह।
जिण घर अजा न बंधती सो गजबंध कियाह।।

इणी रायसिंह रै सूरसिंह अर सूरसिंह रा बेटा हा कर्णसिंह। वि.सं.१६८८ सूं १७२६ तक राज कियो। महान वीर, स्वाभिमानी, साहसी, अर द्रढ निश्चयी नरेश हा। इणी खातर तो किणी कवि सही ई लिखियो है कै केई राजा देवाल़यां रा कल़स है तो केई धजावां है, पण इण धजावां रै ऊपरली धजा है कर्णसिंह –

के राजा देवल़ कल़स, केइक राजा धज्ज।
धज ऊपर कमंधां धणी, ओ करनाजल़ अज्ज।।

उण बगत दिल़्ली माथै ओरंगजेब रो शासन हो। इण नैं गादी बैठावण में महाराजा कर्णसिंह रै सपूतां केशरीसिंह अर पदमसिंह जिकी वीरता बताई वा आज ई सोनै रै आखरां में मंडित है। इतिहास ग्रंथां में उल्लेख मिलै कै लड़ाई रै मैदान में केशरीसिंह री वीरता सूं कायल होय ओरंगजेब उणां रै वस्त्रां री धूड़ आपरै हाथां झड़काई। पण थोड़ै ई दिनां में ओरंगजेब आपरो रंग बतावणो शुरु कर दियो। महाराजा कर्णसिंह कदै ई उणनैं मन सूं सम्मान नीं देवता अर नीं उणरी घणी गिनर करता। ओरंगजेब आ बात चोखी तरियां जाणै हो। ओरंगजेब एक तोतक रचियो जिणरै तहत सगल़ै राजपूत नरेशां रो धरम बदल़ाय मुसलमान बणावण री तेवड़ी। अटक में सगल़ां नै भेल़ा करिया गया।
क्रमशः

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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