जोगण जूनी जाळ

IMG-20150112-WA0047आभ धरा अवलंब, खंभ खरो जगदंब थूं।
थूं टेको थूं थंब, आखा जग रो आवडा॥1
रमती चाळकराय, मन रँग थळ में मावडी।
सुकवि रहै सहाय, बीस हथी वरदायिनी॥2
जोगण जूनी जाळ, प्रतपाळक पुहमी तणी।
चाळकने चरिताळ,आप बिराजी आवडा॥3
आप तणो आधार,जोगण जूनी जाळ री।
सुकवि थांनें सम्मरे,कर आई उपकार॥4
जबरी मां जोधार, विण हथियारां दळ बळां।
असुर हण्या अणपार,मावड आवड माहरी॥5
कीरत तव कथतांह,आखर मां ओछा पडै।
तावड तडतडतांह रे,आवड वड री छांह॥6
सात मात सँग भ्रात,आप बिराजी ईशरी।
मन रँग थळ बिच मात,जोगण जूनी जाळ में॥7
बाळकियो बडबोल, गलती करतो हूं घणी।
माफ करो अणमोल!, म्हारा अवगुण मावडी॥8
धोरां मँझ धणियाण, आवड मावड ओपती।
बिध बिध करूं बखाण,चाळकनेची चारणी॥9
धर थारै धणियाण, हिरणां तिरणां हेतसूं।
चरता चारणियाण, मंदिर ओपै मोकळो॥10
रात दिवस रमती रहै,मन रँग थळ में मात।
जग जाहर औ बात,पण परतख दीसै नही॥11
जूनी जाजम ढाळ,जोगण जठै बिराजिया।
चाळराय चरिताळ,रँग मन थळ री राजवी॥12
डणके चारण बाळ, डिंगळ गीतां दोहरां।
माता मनरँग वाळ, मोद करै सुणती रहै॥13
झालर बाजै जोर, घोर नगारां गडगडै।
जाणक घन घनघोर, गरजै मढ रे आंगणै॥14
धूप दीप धमरोळ, नवलख री नेजाळ रे।
बाजै तुरही ढोल,आवड मढ रे आंगणे॥15
वीरां मन अँजसावती, कायर करती सूर।
आवड अवनी नूर, आखै नरपत आसिया॥16
आवड कळजुग अंब, फल़ देवै घण फूटरा।
भली मात भुजलंब, जबर जागती जोगणी॥17
आवड आवे ईहगां, वाहर वदां हमेस।
काटण कोटि कलेस, जोगण जूनी जाळ री॥18
छावड लोवड आवडा, डावड काज करेह।
बांहड वळ पकडेह, भव जळ डूबत भगत री॥19
कुण जग होड करेह, देवी थूं वड देव है।
चरण शरण री चाकरी, नरपत नें देजेह॥20
चाळराय रो चित्र, मन रे कागद मांड दूं।
निरखूं हूं नित नित्त, अहनिश आवड नें रहूँ॥21
चारण हंदा बाळ पर, करै चारणी हेत।
मांगै वा दे देत, सांचै मनसूं सेवतां॥22
थळवट धोरां थंभ, मेदपाट रो मान थूं।
सोरठ गूर्जर सब जगह,जोगण वड जगदंब॥23
मावड आवड मौ करो, राज चरण री रज्ज।
पद तव परसण कज्ज, इतरो मांगै आसिया॥24
आवड मां रे चांदणै, सह बैठो संसार।
जिण रो तेज अपार, शीतल़ता पण सांतरी॥25
आवड आद अनादि, जुग जुग सूं पूजै जगत।
इण री आदू गादि, चाळकना री जाळ है॥26
तखत तपै है तेमडै, भाखर वाळी भूप।
साची स्नेह सरूप, मां आवड महिमामयी॥27
तखत बिराजै तेमडै, सात बैन सुरराय।
दिल नें आयी दाय, बिसारी नँह बीसरे॥28
भाखर पर भाळीह, जाळ जाळ पर जोगणी।
रहती रखवाळीह, राय तेमडै राजवी॥29
लाल धजा लहराय, आवड मढ रे ऊपरां।
सरस देख सुख थाय,जद उण देखै जातरू॥30
तारंगशिला तूं ज, बैठी है मां बाघ पर।
एक अचंभो मुझ्झ, नरपत नँह निरखी नयण॥31
पान पान परतख्ख, जाळ जाळ पर जोगणी।
देवी काढै दूथियां, दिल सूं सेव्यां दख्ख॥32
जमियां जेसाणेह, गढां मढां गिरि कंदरा।
मोद मनां आणेह, आवड मां अवनि पति॥33
रहौ तेमडै राय, रात दिनां हिरदै सदा।
मांगूं बस औ माय, पाय पडे नें आप रे॥34
रहौ मात राजीह, बाजी बाळ सुधारजो।
थारी नाराजीह, ताराजी जीवन तणी॥35
चरण कमल़ री चाकरी, दीजो आवड देव।
सदा करूं तौ सेव, रहूं राज रे राज में॥36
मन कमलासन मौज सूं, आई बिराजो आय।
मात चिंत मिट जाय जिण सूं जग जंजाळ री॥37
सातूं बैन सहाय, महिरख भाई संग में।
रहै तेमडैराय ,जिण रे वो नर जीतियो॥38
आवड मावड थूं वडी, भलो रोकियो भांण।
लम्बी लोवड तांण, कुण समवड थारी करे॥39
बध बध करो बखांण,भाखर वाळी भूप रा।
मात दाळदर मेटसी, आवड सुण आपांण॥40
बखत जदै अबखी हुवै, रखत बाळ रो ध्यान।
तखत तपै है तेमडै,आवड सगत अपाण॥41
आवड मां अबखी बखत, सगत सहाय सदाय।
जिण रे होवै जोगणी,उण रे चिंता काय॥42
तावड जग जंजाळ है, मावड आवड छाँव।
धावड औ धरणि तणी,गा वड मां रो नाँव॥43
तखत तेमडै राय रो, औ इक वडो सुभाव।
खीजै न को उपाव, रीझै तो राजा करै॥44
खडा तेमडै राय मढ, बडा बडा उमराव।
रहै पळोटत पाँव, आवड मां रा अहरनिश॥45
जबरी सबरी जोगणी, निबळ सबळ री नाथ।
गजब आप गुण गाथ,कथ नँह आवड हूं सकूं॥46
आवड थारै आंगणै, राव रंक सब एक।
सुख समपै मन देख, नीच ऊंच देखै नहीं॥47
तखत तेमडै राय, राई ने परबत करै।
मात साथ जिण रे रहै, सुख उण वधै सवाय॥48

“आवड आखै आसिया “सूं

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