जूझार मेहरदान संढायच माड़वा

माड़वो पोकरण रै दिखणादै पासै आयोड़ो एक ऐतिहासिक गांव है। जिणरो इतिहास अंजसजोग अर गर्विलो रैयो है। पोकरण राव हमीर जगमालोत ओ गांव अखैजी सोढावत नै दियो। जिणरी साख रै एक जूनै कवित्त री ऐ ओल़्यां चावी है।

हमीर राण सुप्रसन्न हुय, सूरज समो सुझाड़वो
अखै नै गाम उण दिन अप्यो, मोटो सांसण माड़वो

इणी अखैजी रै भाई भलैजी रै घरै महाशक्ति देवल रो जनम हुयो।

भलिया थारो भाग, देवल जेड़ी दीकरी
समंदां लग सोभाग, परवरियो सारी प्रिथी

ओ ई बो माड़वो है जठै भगवती चंदू रो जनम हुयो जिण सांमतशाही रै खिलाफ जंमर कियो। इणी माड़वै मे अखै री गौरवमय वंश परंमपरा मे माणजी रै धड़ै मे धरमदान रै घरै मेहरदान संढायच रो जनम हुयो।

उण दिनां जैसलमेर माथै महारावल़ रणजीतसिंह रो शासन हो। रणजीतसिंह री पूरी बागडोर इण रै पिता अर नाचणै ठाकुर केशरीसिंह रै हाथ मे ही। एकर मेहर दान कतार लेय आवता जैसलमेर रुकिया। चारणां री कतार, दूजी जात रा आदमी ई भेल़ा भिल़ग्या ताकि किणी भांत रो कोई लाग नीं लागै। कतार देखतां ई राज रा आदमी आयग्या अर दाण मांगियो। कतार रा मुखिया मेहरदान संढायच। उणां कैयो कै कतार चारणां री अर चारण दाण मुक्त है। दरबारी नी मानिया। बात बधगी। छेवट बात दरबार तक पूगी। दरबार कैयो कै मेहरदान नै छोडर दाण ले लियो जावै। आ बात सुणर मेहरदान कैयो कै म्हारै साथै जिकी ई जात रो है म्हारो भाई। दाण नी तो म्है दूं अर नीं देवण दूं। छेवट बात इति बधगी कै साथलां रो दाण बचावण सारू मेहरदान गड़ीसर माथै तेलिया करण री तेवड़ी। उठै आंटिये टीकां वाल़ां री जमात रुकियोड़ी ही।

मेहरदान उणां रै महंतजी नै कैयो कै म्है तेलिया करूला आप म्हारी मदत करो। महंतजी कैयो आप जंमर करो म्हारै साथै १४० साधू है जितै उणां रै फुरणां वायरो बैवै जितै तक आप नै कोई नी रोक सकेला। मेहरदान नै गड़ीसर माथै तेलिया करण सूं रोकण खातर दरबारी आया पण साधुवां नै मेहरदान रै बदल़ै मरण नै त्यार देख पाछा फुरग्या।

आसुदान संढायच रै आखरां मे:

गड़ी सरवर पास गढवी, तास बगतर तेल
आयस सातां बीस आयां बांध कमरां वेल
तो जबरेलजी जबरेल जल़ियो मेहरो जबरेल

मेरहदान ज़मर कियो। सड़ू नै तीन दिन तक संन्यासियां रुखाल़यो। तीसर दिन महंत सड़ू मे घी सींचर कैयो “ले भाई मेहरदान अब तुम तुम्हारा काम करो हम जा रहें है”। कैयो जावै कै उणी बगत एक ज्वल़ा प्रगटी अर सीधी महल कानी संचरी। कैवै कै उणी बगत रणजीतसिंह बावल़ो हुयग्यो अर कैवण लागो के ओ मेहरदान आयो !ओ मेहरदान आयो। ” पूरै शरीर मे शीत वापरगी अर तीजै दिन रणजीतसिंह रो प्राणांत हुयग्यो। सात पीढी तक लगोलग खोलो आयो। महल मे सणणाटो रैवतो। मोती महल रो एक कमरो आज ई मेहरदान रै डर सूं बंद पड़ियो है। छेवट गिरधरसिंह री बगत मे गोरहर छोडर महल री जागा मंदिर नाम राखर निवास कियो जणै जायर थोड़ी शांति बापरी। मेहरदान संढायच गड़ीसर माथै वि सं १९२१ जेठ सुदि ८ सोम रै दिन तेलिया करर चारण चरित्र री चंद्रिका नै चोताल़ै चावी करग्यो।

म्है ई इण महावीर री प्रभता सुणर एक प्रहास साणोर गीत बणायो जिको आप विद्वानां री निजर कर रैयो हूं:

मैर संढायच माडवै, केव्या रै सिर काल़
धरमावत सारी धरा, भारी प्रभता भाल़

~~~गीत प्रहास साणोर~~~
मुणां मेहरो संढायच माड़धर माड़वै
जब्बर कुल़ अखै रै भांण जांणो
करीग्यो अमर कथ वरीग्यो कीरती
रेणवां भरीग्यो गुमर रांणो  १

ऊपरै धरा रै बात अखियात आ
राज रणजीत इल़ माड राजै
भूंडरा कांम के किया उण भूपती
लोयणां महमती नको लाजै  २

मैर सूं मांगियो दांण उण माडपत
लीक मरजाद री साव लोपै
भरै नह दांण आ आंण है भांणवां
केवियां कड़कियो कवि कोपै  ३

कटारी करां गह कियो आपांण कवि
अटारी बात निरप हूंत आखी
सटै ओ दांण रै प्राण दां सनातन
सूर ससियांण इण माग साखी  ४

तेलिया वसन आ इति अख तेवड़्या
उपरै गड़ीसर गूंज आयो
धधकती ज्वाल़ नै गात हद धारनै
जूझियो जोर वो धरम जायो  ५

आंटिया टीलायत भीर मे आविया
वीर वण संनासी सात वासी
सड़ू नै सींच ने पुकार्यो सकव नै
दूठ रणजीत नै मोत दीसी  ६

सुकल़ वा अष्टमी जेठरी इकीसै
स़मत जिण उनीसै सोम साखी
जूझियो जोर सुत धरम रो जोरवर
रसा जसजोग वा बात राखी  ७

वापरी सीत रणजीत रै वदन मे
सदन मे सांपरत सुन्नसाणो
मरीग्यो गावल़ो होयनै माडपत
जिकै दीह तीसरै साच जाणो  ८

पीढियां सात तक धणी नह पाट रो
जोयलो महल मे नको जायो
खोल़ायत लगोलगो जदुपत खागधर
ईहग रै कोप सूं बीह आयो  ९

करी डणकार बण रात री केहरी
ऐहरी बात आ सुणण आवै
महल मे कंपियो मेहर सूं माडपत
जदूपत म़ंदरां वास जावै  १०

सगत री महर सू जोर वो संचर्यो
थापग्यो अवन पर लीक ठावी
महाभड़ मारकै देखलो महीपर
च़दू री ओल़ नै करी करी चावी  ११

सुणी कवि गीधिये कीरती सचाल़ी
वीरती तणी ऐ अमर बातां
सा़भल़ै मेहरा मोद सरसावियो
ठीक मन आवियो गीत ठातां  १२

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