जूझार हणूंवंतसिंह रोहड़िया सींथल़ रो सुजस

सीयां हमीरां सांगड़ां, मिल़ियै जाझै मांम
सांसण सीथल़ है सिरै, वीसासौ विसराम

महाकवि दुरसाजी आढा रो ओ दूहो सींथल़ री सांस्कृतिक विरासत, स्वाभिमान साहस अर टणकाई री टेक राखण री अखी आखड़ी रो साखिधर है। सींथल रा संस्थापक सांगड़जी रो पाटवी सपूत मूल़राज। मूलराज करनीजी रा अन्नय भक्त। करनीजी खुद सींथल़ पधारिया जद मूल़राजजीनै खुद आपरै हाथां सू जागा बताय कैयो कै आगै सूं अठै देवी री पूजा करजै आज उणी जागा करनीजी रो भव्य मंदिर है। इणी मूलराजजी री वंशज सींथल़ मे मूल़ा बाजै। मूल़राजजी री वंश परंमपरा मे पदमसिंह हुया अर इणां रै घरै हणुंवतसिंह रो जनम होयो। उण दिनां बीकानेर माथै महाराजा रतनसिह रो शासन हो, उणां रो एक मुलाजिम रिड़मलसर रो सिपाही मुसलमान हो। वो एक वार आपरी टुकड़ी साथै सींथल़ रुकियो। सींथल़ मे हजामत री बात माथे इणरी सींथल़ रै एक नाई सूं तणातणी हुयगी अर उण नाई रै कांमड़ी री देयदी। नाई जाय हणूंतसी नै कैयी । आ बात हणूंतसी सूं सहन नीं होई। उणां जाय उण सिपाही नै उणी कांमड़ी सूं कूटियो। सिपाही दरबार मे जाय आ बात कही। उणी दिनां किणी बात नै लेय महाराजा रतनसिंह रै खिलाफ देशनोक मंदिर मे धरणो चालै हो, सींथल रा लगैटगै सगला मोजीज मिनख उण धरणै मे शामिल हुवण गयोड़ा हा। लारै मोटयारां मे फगत हणूंतसी एक अर एक इणां रो नायक हो। देशनोक सूं धरणो उठ ज्यावै इणरी तजबीज दरबार आपरै सलाहकारां सूं पूछी तो इण सिपाही सींथल़ नै लूटण री पाटी दरबार ने पढा दी। दरबार मूक सहमती दे दी। विक्रम संमत १८९३ री बैसाख सुदि ९ रै दिन बीकानेर री एक टुकड़ी घेरो दे दियो। स्वाभिमानी हणूंतसी एकलै इण टुकड़ी सू अदम्य साहस रै साथै मुकाबलो कियो। आखिर मे इण वीर तेलिया कर आपरै शरीर री आहुति अग्नि नै समर्पित कर आपरै चारणचार री चंद्रिका चतुर्दिक चमकाय आपरो अर कुल़ रो नाम अमर करग्यो। उणी जौहर मे इणां रै साथै इणां री दो काकियां ई जिणां मे एक खिंदासर री रतनवण अर एक ढाररवाल़ा री लाल़सण ही, जौहर री ज्वाल़ा मे आपरी वंश परंमपरा नै पवित्र करगी। समकालीन कवियां री रचनावां तो देखण मे नीं आई पण इणां रा परवर्ति कवि जसूदानजी बीठू रो एक गीत उल्लेखणजोग है। म्है ई एक गीत अर एक छंद लिखियो सो आपरी निजर कर रैयो हूं।

पेखो मूल़ा पाटवी, इल़ा सींथल़ अभीत
हणवंत राखी हेकलै,रंग पाटव्यां रीत
गीत सफाखरो
आयो लूटबा रतन बीकाण वाल़ो सींहाण इल़ा
अगै ईहगां सूं मूछाल़ो धराल़ो ईठ
रीत खत्रवट तणी जको त्यागी वो रढाल़ो
धेखी सुरतेसवाल़ो जू क्रोधाल़ो धीठ
मुदै छेड़ै कराल़ो फणाल़ो सैंस मिणांवाल़ो
जोराल़ो पदम रो पूत पटाल़ो जेम
दीठो दृगां रोसाल़ो पिंड पांण वाल़ो दूथी
इल़ा रो रुखाल़ो बीठू हणूं बडाल़ो ऐम
अड़वडै कैई भटा सुघटा अखाड़ां ऊभा
आड़ांधारी धकै काल़जा ऊगाड़ां आय
सूहड़ां सुणाई गांम रै गवाड़ां रागां सिंधू
धाड़धाड़ां सांभ राड़ां मे हणूंतो धाय
जोर लड़ै हणूं सांकल़ां विछूटै सेर जिमां
रटै नाम धुरजटी जू अजीत रैण
हटै नको मांडियां पग नटै नको हटीलो
दाता अटपटो धरा सटै सीस दैण
गढवाड़ां तणा केवियां वितंडां कीध गंजै
धिनो जीत झंडा मूवां ही करां धार
खाडांधारी जदै नवेखंडां मे सुजस खाटै
पूत पदम रो पूजीजै प्रखंडां पार
कवियणां तणा सारणा सुधारणा सुकामां
मलेच्छां तणा मारणा विडारणा माण
धिनो धारणा धरम चारणां धरा पे धिनो
अबेढी वारां मे धिनो उबारणा आंण
साखां आज थारै तांण सांसणां सीहांण सिरै
भांण हणूं वश हंदो रांण बीठू भाल़
सेवियां बगस बगस बांण पवाडां बखांण सारू
पांण रखै गीध माथै पखै भीर पाल़
पह लड़ियो पदमेस रो ,जुडियो लाटण जीत
हड़ियो हद हटियो नही ,रोहड़ियो रंग रीत
सींथल़ मे मूल़ा सधर, प्रखर पाटवी पात
हड़ियै राखी हेकलै ,वसू सुजस री बात
तवां अठारै तैंणवै ,निमल़ बैसागां नम्म
इण विध वरण उजाल़ियो ,रोहड़ खागां रम्म
कमध थल़ूपत कोपियो ,रीत तजी रतनेस
आयो ले असुरांण नै ,नासत लूटण नेस
दोयण बणियो दूथियां ,लोयण तजदी लाज
आयो सींथल़ ऊपरै ,सैन बलां खल़ा साज
सोरठा
छोगाल़ो छिड़ियोह, कव भिड़ियो कमधां कटक
रण बिच रोहड़ियोह, हड़ियो हद हटियो नही
छंडै छतपतियाह, आगल़ डर रण आंगणो
हाजर हणवंतियाह, तूं जुपियो पदमेसतण
समवड़ सादूल़ाह, रजवट उर मूल़ा रखै
अइयो एधूल़ाह, हणवंतिया पख हेतवां
~~~छंद रोमकंद~~~
सजियो रतनेस थल़ूपत सांप्रत, सांसण लूटण काज सही
तजियो मरजाद बुवो मग ताकड़, लाज उरां लवलेस नही
खिजियो धर सींथल़ माथ खगांधर, कांण सुलोप कियो कजियो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणू जस नाम लियो  १

डरपी मन रैयत फौज दिठी द्रग, पात चढै कुण को ज पखै
परजा दिलगीर पुकार पगां पड़, रांण हणूं रखवाल़ रखै
असुरांण सैनापत आंण उथापण, थंभ हरोल़ रोजात थयो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणू जस नाम लियो  २

सुण सींधव राग अयो सज सांमथ, वीण सुसांभल़ नाग बहै
बजराग इयै विध आविय वीदग, डांण लँकाल़ ज्यूं माग दहै
अणथाग रीसाल़ अभाग अरीदल़, भाग सुईहग नेस भयो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणू जस नाम लियो  ३

अड़ियो हणवंत अरीदल़ आगल़, रोहड़ियो रण बीच रसै
जुड़ियो खग झाल रिमां घड़ झूड़ण, चक्ख क्रोधाल़िय आग चसै
मछराल़ भिड़ै मरजाद सुमंडण, भाल़ छिड़ै विकराल़ भयो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणू जस नाम लियो  ४

अरिकाल़ बणी किरमाल़ सुईहग, बेख धरा रतखाल़ बहै
तन झाल़ उठै रण बीच सु ताकव, रीत रसा उजवाल़ रहै
रढियाल़ हठाल़ लहै जस रेणव, राड़ बिचाल़ असंक रयो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणू जस नाम लियो  ५

धर काज हुवो तिल तिल्ल धिनोधिन, दोयण चूंथिय जंग दखां
सचियाल़ रुखाल़िय सांसण सींथल़, पात चढाविय नीर पखां
हरखै इयै पांण दिसोदिस हेतव, जूझ रखी मरजाद जयो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणू जस नाम लियो  ६

रतनेस लही अपकीरत राजन,वीरत रोहड़ तैंज वरी
सच तीरथ रूप हुवो धर सींथल़, कीरत खाटण बात करी
रतनूं कर जोड़ रचै कवि रूपक, कांन करै गिरधार कयो
पुरखां तण वाट बुवो पदमावत, लाट हणूं जस नाम लियो  ७
~~~कवत्त~~~
रंग रे रोहड़ रांण, मही मरजादा मंडी
देह छंडी रण देख, छत्रधर भोम न छंडी
जस झंडी जग मांय, धिनो पदमावत धारी
सारी दुनिया साच, आज जयकार उचारी
पाटवी पणो रखियो प्रगट, जोर हणूं रण जूझियो
बाचवै सुजस गिरधर विमल़ पातां, सुद्ध मन पूजियो

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