काल कवि – डॉ. रेवंत दान बारहट

समय के महासमर में
मैंने शाश्वत शब्दघोष किया है
शब्द मेरे शस्त्र रहे हैं
शब्द शक्तियां आत्मसंयम रही हैं
मैं सनातन साक्षी हूं
असंख्य सभ्यताओं
संस्कृतियों की श्रृंखलाओं
शक्तिशाली सत्ताओं का,
मैं साक्षात हुआ हूं
अनेकानेक सूरवीरों
स्वयंभू शासकों
दानवीरों, प्रणवीरों और
विद्या के विविध वाग्वीरों से
आक्रांताओं और अत्याचारियों से
और उनसे सताए गए संतप्तों से भी
इन सभी से
हां ! इन सभी के समय से
होता रहा है मेरा संवाद!मैंने देखी है
कई खुशहाल सभ्यताएं
मनुष्य का चरम उत्कर्ष
उसका चरम वैभव
और चरम अहम भी
मैंने देखी है कई आपदाएं
मानव निर्मित और प्रकृति निर्मित,
मैं साक्षी रहा हूं
बनती और मिटती हुई
असंख्य सभ्यताओं का।

मैंने रचे वेदों के श्लोक
होतृ बनकर गाई हैं ऋचाएं
मैं मंत्र दृष्टा ऋषि रहा हूं
अपने समय को रचने वाला
मैं कवि वेद व्यास हूं
करुणा का दृष्टा वाल्मीकि हूं,

इलियड और ओड़िशी में
देवों और दानवों की गाथा कहने वाला
मैं हूं युनानी आदि कवि होमर,
मैं दजला फरात की सभ्यता का
अंधा कवि रोदकी,
मैं रोमांचक कथा गीतों का
पहला कवि विलियम वर्ड्सवर्थ हूं,
समस्त चर अचर का तत्व मीमांसी
मैं हूं दार्शनिक कवि जॉन डन,
मैं हर अंतस के अनुराग का ज्ञाता
विरला कवि राईनर मारिया रिल्के हूं,
और मैं ही हूं फेनी के नाम
प्रेम कविताएं लिखने वाला
रोमांटिक कवि कीट्स,
मैं निर्वैयक्तिकता और परम्परा का
समन्वयवादी कवि टी एस इलियट,
मैं अंग्रेजी का पहला वाल्मीकि चौसर हूं,
मैं ही हूं संत कवि मैथ्यू अर्नाल्ड,

मैं भक्ति का उदगम हूं
आलवार और नयनार-
के संगमकाल का दिव्य प्रबन्धम हूं,
शाक्य मुनि को शब्दबद्ध करने वाला
मैं हूं कवि अश्वघोष,
देवभाषा का उज्जवल नक्षत्र
माघ,भारवी,भवभूति और कालिदास
मैं हूं पतंजलि का योगभाष्य,
मैं कनफटा नाथ साधुओं का
अलख निरंजन हूं,
मैं हूं भैरवी साधना में लीन
सहज सिद्ध कवि सरहपा,
मैं आल्हा का गायक जगनिक हूं,
मैं रासो का पहला रचयिता
कविता के आकाश का
कवि चंद बरदाई हूं,
मैं खड़ी बोली की पहली
खड़ी पाई लिखने वाला
तूती ए हिन्द – अमीर खुसरो हूं,
मैं हूं देसील बयना का
प्रथम श्रृंगार कवि – विद्यापति,
समय का साखी
सबद सबद में सांच कहने वाला
लहरताला तालाब में मिला
न हिन्दू,न मुसलमान
बल्कि मानवता की संतान
मैं कबीरदास हूं,

मैं हरि के गुण गाने वाला
देवी स्तुति का साक्षात छंद
चारण कविता का कीर्ति स्तम्भ
ईसरा सो परमेसरा-
मैं बारहठ ईसरदास हूं,
मैं मां हिंगलाज की चिरजा
पाबू का परवाड़ा
रामसा पीर की बाणी
करुणामयी करणी मां के मढ़ में
काव्य कलरव करने वाला काबा हूं,
मैंने लिखे हैं देवताओं के चरित
मैं रामधुन का रचयिता
कलिकाल के कष्टों से
मुक्त की अरदास करने वाला कवि तुलसी हूं,
मैं देख आया हूं
वृंदावन की गली गली
मैं रुनकता का प्रज्ञाचक्षु कवि सूर हूं,
मैं हूं सूफी –
मसनवी में कहने वाला
मुल्ला दाऊद,मंझन
और मालिक मुहम्मद जायसी,
कान्हा की भक्ति में लीन
इकतारे पर गाती हुई
स्त्री मुक्ति का प्रथम स्वर
मैं हूं मेड़ता की मीरा,
मैंने सिखाई रीति की नीति
मैं छंदों का अजायबघर
कठिन काव्य का प्रेत
आखर का आचार्य
कवि केशवदास हूं,
मैं सतसैया का साधक
बद्ध ,मुक्त और सिद्ध भी
मैं नावक का तीरंदाज बिहारीदास हूं,
मैं आलम,बोधा और पद्माकर का पद हूं,
मैं हूं घनानंद की पीड़ा का प्रस्तोता,

मैं ग़ज़ल की प्रथम बहर
उर्दू के आकाश का आफ़ताब
असददुल्ला खान गालिब हूं,
मैं शायरी के मतले जैसा
मीर तकी मीर हूं,
मैं हिन्दुस्तानी तरन्नुम
वली दक्कनी का दीवान हूं,
मैं अपने सेवक को शब्दों में
सदा के लिए अमर करने वाला
कवि कृपाराम हूं,
मैं अंग्रेजी दासता के विरुद्ध
देश में शब्द शंखनाद करने वाला
चारण कवि बांकीदास हूं,
आजादी के महासमर में
अमर शहीद वीरों की
सतसई लिखने वाला
मैं मिसण सुर्यमल्ल हूं,

मैं नए जमाने की हिंदी का भगीरथ
जबान ए हिन्द का शिखर
काव्यकिर्ती का कलश भारतेन्दु हूं,
मैं हूं निराला की साहित्य साधना,
प्रसाद का प्रतिभिज्ञा दर्शन,
महादेवी का चिरविरह,
पंत प्रकृति में खिला प्रथम पल्लव हूं,
मैं अनजान बीहड़ रास्तों का पथिक
असाध्य कवि अज्ञेय का तारसप्तक हूं
मैं हूं मानव मुक्ति की संवेदना का साक्षी
अंधेरे में उजाले का दृष्टा मुक्तिबोध,
मैं हूं शाब्दिक आडंबरों का विध्वंसक
कविता में ज्वालामुखी विस्फोट की ध्वनि
खरी खरी कहने वाला कवि धूमिल,
मैं इंकलाब की आवाज़ हूं –
नज़रूल इस्लाम,फ़ैज़,फिराक और साहिर
मैं दुष्यन्त,पाश और गोरख पाण्डेय हूं।

कुछ भी नहीं हूं और
सब कुछ हूं मैं
अपरिमित शक्ति का योजक
अदृश्य अछोर शून्य हूं,
सदियों से समय की सरगम को
सुर ताल और लय में
अपने शब्द सितार पर गाता हुआ
आखर का आलोकित रवि हूं
मैं था, मैं हूं और मैं रहूंगा
मैं संवेदना की अमिट छवि हूं
कथ्य अकथ्य को कहने वाला
मैं काल कवि हूं।

~~रेवंता

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