कांई ठा कांई होवेला

कांई ठा कांई होवेला

म्है थारै मूंडै री मीठी मुल़क
आंख्यां मे झरती अपणास
विश्वास रै बोलां पर
चमगूंगो सो, चितबगनो सो
उतरतो रैयो अजाणी
ढल़तोड़ी ढाल़ां पर
चढतो रैयौ ऊंचोड़ी पाल़ां पर
घालतो रैयो हींड लंफणां मे
मोदजीतो रैयो मनड़ै मे
तणतो रैयो तनड़ै मै
पण नीं सोची कै
सिखरियै डाल़ै सूं विछूट्यां
किरची-किरची होय खिंड्योड़ी
हाड्यां नै कुण जोवेला
कांई ठा कांई होवेला

प्रीत रा पगलिया, नीं ओल़ख सकियो
नीं ओल़ख सकियो, धेख रै भेख नै
भ्रम पाल़ियो नेह रे मेह रो
पाटी आंख पर बांध
चढ्यो उण ऊंठ आंधोड़ै
बूवो अत गाढ मे आगै,
राह ऊंधोड़ी
वाह रै बोकार मे
डग डागै रा डगमगायां
कांई होवै तगतगायां
दे दियो अब जाब पतियारै
हाथ दोवां सूं धोवेला
कांई ठा कांई होवेला

घटावां घात री देखो
अटारी आज उतराधी
बीजल़ी कांठै कड़कती
अचूकी आय नै पापण
पड़ैला फाड़ छपर नै
विश्वास मे बिजल़ाय वा तो
टापरो सिल़गाय पूरो
चड़ैला आभ मे पाछी
गतागम माय नै धोरी
संभेला झांफल़ा खातो
उठेला पांपल़ा करतो
जितै तक गोह पाछी वा
बड़ैला देखला बिल मे
खरबलिया देखलै खिल नै
खावेला मार फूंफाड़ा
पक्योड़ी देख खेती नै
थकै बल़ साव खोवेला
कांई ठा कांई होवेला

अंकूरा ऊमरे दीख्या
पड़्यो मन दोघड़ी चिंता
ऊगै की देख आगीनै
हुवो भयभीत भटके से
हियै मे खटकती सूल़ां
पड़्या पग लाडरा पाछा
खण्यो झट खाड हाथां सूं
पनूरा देख दाटण नै
संभ्यो हद मोद सूं मांटी
बिनां हद बात सोच्यां रै
मिटावण कूख धरती री
खूटोड़ो बायर्यो हाथां
कंवाड़ी आपरै पगलां
सुणै नीं देख करल़ाटो,
मच्योड़ो आपरै हिरदै
पंग्यो हद पाप सूं पापी
बता किण गंग धोवेला
कांई ठा कांई होवेला

बस्ती आपरी देखो
असैंधी साव दीखै है
रम्योड़ा आंगणै एको
आजाण्या देख उणियारा
आबोला मूरती बणिया
मसीनां जेम चालै है
मनां री देख मनवारां
उठीग्यो देखले ढारो
सज्जण मिल़ बाथियां मिल़ता
अबै तो बोल बतल़ायां
आवै झट बाथियां पड़ता
पड़ीग्यो पार पतियारो
लगै डर आंगणै मांही
दिखै निज सैण अपरोगा
भुजां रो देख अभरोसो
बता किण गाढ सोवेला
कांई ठा कांई होवेला

भाव तो साव नीठ्योड़ा
चले मन डाकणी चाल़ो
शिकारी देखले सिकरो
पंजां रै पाण तकियोड़ो
लुकैला ठौड़ किण चिड़ियो
झा़फल़ा इण भांत खातो
उठ्यो विश्वास रो ढारो
बंतूल़ा बैम रा चालै
बड़यो हर भवन मे चाल़ो
लगी उकरास वा देखो
मिटी अपणास री आशा
रसना स्वाद पर लागी
बूझ्योड़ी भूख फिर जागी
डिग्यो मन डाकणी वाल़ो
गिणै नी पारका सागी
ऐ तो इणी गत आक चोवेला
काई ठा कांई होवेला

~~गिरधर दान रतनू “दासोडी”

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