काळिया के सोरठे

सोरठा
पैला वाल़ी प्रीत ,सबदां में सिमटी परी।
रजवट वाल़ी रीत ,कहण सुणण री काल़िया।।१

सजन बैठ सतसंग,निरमल़ मन कीधो नहीं।
गहर नाय नित गंग ,कारी लगै न काल़िया।।२

आदर रू अपमान,लिखदी विधना लीकड़ी
मनसुध साची मान,कुण लोपेला काल़िया।।३

सबदां घड़ै सुचंग ,भलां घड़ै भर भावरी।
उर में करण उमंग,करजै कविता काल़िया।।४

बोलै मोटा बोल ,वसु मोटा ई बजण नै।
मिनख करेला मोल,कूड़ साच रो काल़िया।।५

वैण नैण बतल़ाय,आदर अर अपमान नै।
सो पूरी समझाय ,कहणी पड़ै न काल़िया।।६

पग पग भम्यो पहाड़,ठोकर ली हर ठौड़ री।
नेह तणी आ नाड़,करां छूटगी काल़िया।।७

साची कहण सतोल ,संकै नह उर में सधर।
मरदां वारां मोल,कहो अमोलख काल़िया।।८

काढै असर्यो काज ,बिगड़ी में भीरु बणै।
अवनी ऊपर आज ,कितरा दीसै काल़िया।।९

बोली इमरत बेख,विस बोली में बोहल़ो।
नर वै गिणजै नेक,कस इमरत ले काल़िया।।१०

गावै गोविंद गीत ,अहर निसा घट आपरै।
जस जग लेवै जीत,करणी ऊजल़ काल़िया।।११

सदा बेलड़ी सींच नाल़ पसार्या नेह रा
व्रज देश रै बीच करग्यो घर घर काल़िया॥१२

पह गीता रो पाठ कथियो अरजण कारणै।
हिंयै ग्यान री हाट करग्यो हर जन काल़िया॥१३

चावो माखणचोर बजियो व्रजदेशां बिचै।
चोगी तैं चितचोर कितरा कीना काल़िया।॥१४

मन बिन रा मेवाह तज्या दुजोधन दूठरा।
स्नेहभाव सेवाह कर छिलका ले काल़िया॥१५

दल़ियो मामो दूठ भड़ अल़ियो भाणेज तूं।
जग में तोसूं जूट कोई न उबरै काल़िया॥१६

कुल़ री राखै काणआण निभावै आपरी।
जग में ज्यांरी जाणकदै न मिटसी काल़िया।।१७

परहित करणा पेख,निज हित री चिता नही।
मानै मीन न मेख,कह अवतारी काल़िया।।१८

लोयण ज्यांरै लाज,उर में अपणायत इधक
करै पराया काज,कह अवतारी काल़िया।।१९

दारू अमल सूं दूर,नसो करै हरि नाम रो।
भाव चाव भरपूर,कह अवतारी काल़िया।।२०

राखै आदू रीत,नीत ऊजल़ी बह निपट
जस जगती में जीत ,कह अवतारी काल़िया।।२१

मानै सबनै मीत,दुसमण को देखै नहीं।
पर निज एको प्रीत,कह अवतारी काल़िया।।२२

सब री सज सेवाह,मेवा बिन करणी मुदै।
है सतवट हेवाह,कह अवतारी काल़िया।।२३

सत री देवै सीख,समदरसी रेवै सदा।
तण हद राखै तीखकह अवतारी काल़िया।।२४

बसती बोरंगाह,वासी दीठा बोहल़ा।
रेवै इकरंगाह,कोयक विरल़ा काल़िया।।२५

नहीं नसा नजदीक,नहीं नसां दिस न्हाल़वै।
थिर मन राखै ठीक,कोयक इसड़ा काल़िया।।२६

खावण बटिया खीर,निरमल़ पीवण नीर वो।
साजो रहै सरीर,की फिर चिंता काल़िया।।२७

बेवै सतवट वाट,खाट सुजस ले खलक सूं।
हिंयै हेत री हाट,कोयक इसड़ा काल़िया।।२८

देखो ईसरदास ,जग जोड़ै जगदीश रै।
बारठ हरि विसवास,कियां हुवो रै काल़िया।।२९

नामी नरहरदास,रंग भगत व्हो रेंदड़ी।
सिमरण सासो सास,कियो राम रो काल़िया।।३०

सांप्रत सांगड़ियोह,वीरदास वीठू बडो।
आंटिलो अड़ियोह,कैहण साची काल़िया।।३१

भीम हुवो कुल़भाण,अवनी आगै आसियां।
बसुधा बहै बखाण,कविता निरमल़ काल़िया।।३२

सुदतां में सिरमोड़,बांको रतनू बाजियो।
ताकव उणरी तोड़,कोयन सुणियो काल़िया।।३३

हर रो भगत हमीर,जो रतनू वो जगत में।
धर उर साचो धीर,कानड़ भजियो काल़िया।।३४

पेखो वो परताप ,महिपत भड़ मेवाड़ रो।
आजादी हित आप,कसियै खागां काल़िया।।३५

गोविंद गुण गायाह,मेड़तणी मीरां मुदै।
परम्म पद पायाह,करम आपरै काल़िया।।३६

पेखो वो प्रिथीराज,रसा जँगल़ राठौड़ कुल़।
सुकव भगत सिरताज,कमंध हुवो रै काल़िया।।३७

पदमो रासो पेख,खेडेचा जस खाटणा।
मारी अदतां मेख,कमंध जंगल़ रां काल़िया।।३८

हुवो रावल़ हरराज,जादमपत जैसाण रो
कर पूजा कविराज,कीरत वरग्यो काल़िया।।३९

स्वधर्म राखण सीख,सोनगरै दीनी सधर।
लेस न त्यागी लीक,किणियागिर न्रिप काल़िया।।४०

मुरधर रो महिपाल़,मन मोटै रो मानसी।
करां कलम करवाल़,कमंध राखतो काल़िया।।४१

अंगरेजां अड़ियोह,केहरियो किसनेस रो
जेल़ां में जड़ियोह,कवि ना डरियो काल़िया।।४२

सारा सुर नर सेव भूत दैत धोखै भल़ै।
मही बजै महादेव करमां अपणै काल़िया।।४३

देव मोटो दातार हर जैड़ो हर हेक है।
सही मान संसार करै वंदना काल़िया।।४४

हथणापुर हेलोह पांचाल़ी कीनो प्रतख।
छतो साद छेलोह की वो आयो काल़िया।।४५

द्रोपद दुखियारीह प्यारी वा पंडवा तणी।
सुण अरजी सारीह की तूं आयो काल़िया।।४६

चंगो उतर्यो चीर किरल़ाटा नारी किया।
भगवत थारी भीर की कज आई काल़िया।।४७

हेला कर हारीह पांचाल़ी जद पीड़ में।
भगवत वा भारीह की लज राखी काल़िया।।४८

दावै जितरा दाम जाल़ करीनै जोड़लै।
चलै न संग छदाम कान करै तूं काल़िया ।।४९

गिणिया बहै गमार दिन ऊमर रा देखरै।
साचो धणी संभार कुटल़ अजै ई काल़िया।।५०

लिखदे भलां ललाम आखर अणहद ओपता।
कविता मान निकाम किरता जस बिन काल़िया।।५१

अरथ मिलण अनुराग सुर ज सजोवै सांतरा
राम मिलण री राग किता उगैरै काल़िया ।।५२

धर सारी धाम करलै तीरथ कोडसूं।
रीझायो नी राम की कज आया काल़िया ।।५३

खूब भर्योड़ी खोट खल़ थारै में खोबनै।
पाप तणी फिर पोट कुबद्धी उखणी काल़िया ।।५४

नित पाल़ै मन नाग फणधारी फुंकारता।
ईश्वर सूं अनुराग कीकर करसी काल़िया।।५५

आवण जावण ऐथ माग बण्यो मिरतलोक रो।
जो थिर चावै जेथ कियै भरोसै काल़िया।।५६

दूजां ओगण देख खूब गिणावै ख्यांतकर।
आप तणो मन एक कितरा लावै काल़िया।५७

जस कमावै जोय जाप जपै जगदीश रा।
देखी बातां दोय केहूं सार री काल़िया।।५८

मूंगो खोटो माल तोल काण री ताकड़ी।
चवड़ै वांरी चाल किरता देखै काल़िया।।५९

भलपण वाल़ा भाव दरसावै दुनियाण नै।
आप बहै अनियाव कर कर चालां काल़िया ६०

उर बेटै री आस हरजन राखै हेत सूं
बेटी बिनां विकास कीकर होसी काल़िया।।६१

पाबू पणधारीह सत पख जूपियो सूरमो।
धिन मरबा धारीह कीरत कारण काल़िया।।६२

दलितां रै पख देख जूपियो जाहर जगत में।
अवनी पाबू एक कीरत वरग्यो काल़िया।।६३

सबै मिनख इकसार ऊंच नीच एको नहीं।
अजमल रो अवतार कहग्यो रामो काल़िया ६४

तण वीणा रा तार दियो संदेसो देश नै।
सबै मिनख इकसार कहग्यो रामो काल़िया।। ६५

भाल़ छूत रो भूत भूंचावै हिंद भोमनै
रामै सो रजपूत काढण आयो काल़िया ६६

जाट तेजो सो जोर वचन निभावण वीरवर।
अवनी इसड़ा और किता हुवा रै काल़िया।। ६७

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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