काल़िया के सोरठे-शंभू दान बारठ कजोई

पाल़ै सदा हि प्रीत,अबखी वेल़ा आयने।
मानो साचो मीत,कल़जुग मांही काल़िया।।१।।
गफलत मांय गंवार,लङे अपणोंं सु लोक में।
सम्पती मे ही सार,कल़जुग मांही काल़िया।।२।।
लगनी नित लगाय,हरि ने सिमरे हेत सूं।
निरफल जासी नांय,करणी वांरी काल़िया।।३।।
काया थारी काठ,जतन करे क्यो जीव रो।
थिर ना रहसी ठाठ,कोय क वैल़ा काल़िया।।४।।
सुख मे लाखो सैण,मिल़ जासी इण मुलक मे।
दुख मांही सुध लैण,कोय क आवे काल़िया।।५।।
किया अनेको काम,सवारथ हित संसार में।
ठाल़ो रह ग्यो ठाम,करी न भगती काल़िया।।६।।
आप रख्यो अठयाम,मन माया मे मानवी।
चले न हेक छदाम,कौङी भेल़ी काल़िया।।७।।
भल़हल़ ऊगे भांण,चहुंदिश मे कर चांनणो।
रंक अर पूजे रांण,काछपसुत ने काल़िया।।८।।
अवनी मेट अंधार,भल़हल़तो ऊगे भलो।
निवण करै नर नार,काछपसुत ने काल़िया।।९।।

अवगुण मम अणपार,लेखे मत थूं लेस ही।
पातक करवा पार,केवट बणजे काल़िया।।१०।।

पातक रा लख पाप,गोविन्द थूं गिणजे मती।
जपसूं थारा जाप,कदे न भूलूं काल़िया।।११।।


कियो न सुकरत काज,लेस मात्र लखियो नहीं,
आफत पङतों आज,करूं याद तुझ काल़िया।।१२।।

केशव थारा काम,नर मूरख समझूं नहीं।
सगल़ां रा थूं श्याम,काज सरै है काल़िया।।१३।।


शठ नह राखी सार,नारायण रे नाम री।
मनवो खासी मार,क्रौङ जमों री काल़िया।।१४।।


आगे बढियो आप,अवरों सूं रख इसको।
पातक तणा ज पाप,कीकर धुल़सी काल़िया।।१५।।

नित रो लेवूं नाम,सांच रिदै सूं श्याम रो।
करजे परण काम,करुणासागर काल़िया।।१६।।

गुण थारा गोपाल़,पलक हेक ना पोंतरूं।
राखै थूं रखवाल़,करुणासागर काल़िया।।१७।।

राजा ने थूं रंक,रंको ने भल राजवी।
नामी बङा निशंक,करे पलक में काल़िया।।१८।।

सत भूल्यो संसार,दुरमत पूरे देश में।
मारग सही मुरार,कुण बतल़ावे काल़िया।।१९।।


मिनखपणे ने मार,रीझावै नित राम ने।
मांनै किंया मुरार,करणी ऐङी काल़िया।।२०।।

वडो राख विशवास,पूजूं नित परमेसरा।
आप हि पूरण आस,कष्ट निवारण काल़िया।।२१।।

मीत तणो रख मान,मोहन बणाया माल़िया।
भगत वत्सल भगवान,करुणानिधि हे काल़िया।।२२।।

बहे जुगोजुग बात,नरसी मेहते नाम री।
भरियो मोहन भात,क्रौङ छप्पन रो काल़िया।।२३।।

नेनी ने घण नाज,अभणासी आसी अवस।
करण सपूरण काज,करी देर ना काल़िया।।२४।।

पत राखण प्रहलाद,हिरणाकुस ने हेरियो।
सुणी भगत री साद,करुणानिधान काल़िया।।२५।।


मेङतणी पर मैर,गिरधारी राखी गजब।
टीकम सुणने टेर,करी अमर थें काल़िया।।२६।।


करमों री सुण कान,खीच जीमियो खौंत सूं।
मोहन भगतों मान,कोड सु रखियो काल़िया।।२७।।


गज री सुणी गोपाल़,तुरत छुङायो तांतवै,
भगतों राखण भाल़।(थूं)कण कण मांही काल़िया।।२८।।


गिरधर नख गिरि धार,गजब उबार्या ग्वाल़िया।।
निमिया नर ने नार,कानूं आगल़ काल़िया।।२९।।


मोहन माखणचोर,गिरधर किसन गोविंद।
नटवर नंदकिशोर,किता नाम है काल़िया।।३०।।


जस थारा जदुराय,गिरधर हूं गावूं किसा।
संत री करण सहाय,(थूं)कण कण मांही काल़िया।।३१।।


।।शंभू दान बारठ कजोई।।

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