करै भळायां काज

 

( मेहाई सतसई – अनुक्रमणिका )

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जिण नवघण जिमाडियो, बाई दळां बळाज।
वा अनपूरण बिरवडा, मेहाई महराज।।१५२
भाले नवघण रे भली, बाई रही बिराज।
सुगनचिडी बण मां स्वयं, मेहाई महराज।।१५३
भावनगर रा भूप रा, किया मात घण काज।
खोडल मां खुद है स्वयं, मेहाई महराज।।१५४
कूकडिया कुरळाविया, म्लेच्छां रे घट मांझ।
वा बापल री बहुचरा, मेहाई महराज।।१५५
ओखा धर रे आंगणै, रहिया राज बिराज।
मोगल मछराळी बणे, मेहाई महराज।।१५६
खोडल आवड खूबडा, मोगल पीठड मां ज।
नवलख नांमे एक थूं, मेहाई महराज।।१५७
तन रो कर तंबूर अर, सब रव मन मँह साज।
रात दिवस गातो रहूं, मेहाई महराज।।१५८
चाळराय मां चारणी, रह मन रँग थळ मांझ।
वा वरदाई बीसहथ, मेहाई महराज।।१५९
वदां मात वरदायिनी, आद सगत अंबा ज।
श्री विध्या शाकंभरी, मेहाई महराज।।१६०
तूं नव दुरगा त्रंबका, वळ दसमहाविधाज।
सकळ विश्व संजीवनी, मेहाई महराज।।१६१
मन री चिंता मेटतो, आखरमयी इलाज।
धिनियाणी जंगळधरा, मेहाई महराज।।१६२
जगत वडी मां जोगणी, करे सफल सब काज।
म्हारी मां चिंतामणी, मेहाई महराज।।१६३
जदे जूड जबडां गह्यौ, मेंगळ जळ रे मांझ।
तार्यो हरि बण तें स्वयं, मेहाई महराज।।१६४
जग छोडर जाउं जदै, आसो उणदिन काज।
इण सूं आखर नित रटूं, मेहाई महराज।।१६५
गहराई डरिया गजब, पात बिराज्या पाज।
खोज्या सूं मिळिया खरा, मेहाई महराज।।१६६
जामणियां जणियां तणी, धणियांणी धणियां ज।
किनियांणी मणियां मुकट, मेहाई महराज।।१६७
जोराळी घण जोगणी, अर जबरो अंदाज।
वरद हस्त रख बीसहथ, मेहाई महराज।।१६८
तरणी करणी तारणी, वैतरणी बहतां ज।
असरण सरणी कर अभय, मेहाई महराज।।१६९
बेल अमर बिन मूळ री, हरीयल राखण राज।
जीवन री बूटी-जडी, मेहाई महराज।।१७०
अलख निरंजन आप ही, रमती जोगण राज।
अवढरदान अघोरिणी, मेहाई महराज।।१७१
धिनियांणी सम धूर्जटी, ध्यान धरे मढ मांझ।
देवी खुद देशाणमढ, मेहाई महराज।।१७२
जबर आप जगदंब हो, खबरां लेण खळाज।
बण बबरी लीला करै, मेहाई महराज।।१७३
उर बिच उजवाळो करो, तिमिर टाळबा राज।
अरक चंद्र उडुमाल बण, मेहाई महराज।।१७४
जाणणहार जहान री, जण जण घट री मां ज।
बिन माग्यां आपै बहु, मेहाई महराज।।१७५
“मे” कहतां मोगल मिळै, “ह” कहतां हिंगळाज।
“ई” सूं रीझै अंबिका, मेहाई महराज।।१७६
क्यूं किणनें मन री कहूँ, जण जण आगे जा ज।
मात सुणै तो मैं कहूँ, मेहाई महराज।।१७७
कोलाहल सब जग करै, मौन हुऔ मैं मां ज।
जिण दिन लाधी जोगणी, मेहाई महराज।।१७८
दीठा नँह देशाणपत, मन देवळ रे मांझ।
म्है पागल भटकत मुऔ, मेहाई महराज।।१७९
दुःख रा लिखिया दोहरा, कूक बणी कविता ज।
मैं गायी मां सांभळी, मेहाई महराज।।१८०
आई थारे आशरे, बाई रह्यो बिराज।
वरदाई मत बीसरै, मेहाई महराज।।१८१
मत व्हैजै नाराज मां, अरज बाळ री आ ज।
रखो चाकरी राज री, मेहाई महराज।।१८२
जगडू शा री जाज नें, तारी दुहतां गा ज।
रिधू रखै इम लाज मम, मेहाई महराज।।१८३
मनां हाल देशाणमढ, जोगण बसै जिहां ज।
करनल मां करुणामयी, मेहाई महराज।।१८४
सैण सगा किनियांण सब, मात पिता पण मां ज।
बहन मिंत बांधव सखा, मेहाई महराज।।१८५
आखर लिख नित अंबिका, मन री पाटी मांझ।
रोज रोज घूंटत रहूं, मेहाई महराज।।१८६
जगडू शा हो जौहरी, दशरथ चारे गा ज।
नींच ऊंच देखै नही, मेहाई महराज।।१८७
दशरथ हुतो गुवाळियो, अमर कियो मां तां ज।
जात पांत जाणी नही, मेहाई महराज।।१८८
काबो कर करनल्ल मां, रखो चरण मुझ राज।
मढ में नित घूमत रहूं, मेहाई महराज।।१८९
किनियाणी काबो करै, रखो मढां रे मांझ।
चुगै कणक चरणां रहूं, मेहाई महराज।।१९०
धिन आढी देवल्ल जिण, कोख जनमियां मां ज।
सुभ थानक सूवाप मँह, मेहाई महराज।।१९१
आवडमय मां आप हो, हिव जेण हिंगळाज।
भवा समझ तौ नित भजूं, मेहाई महराज।।१९२
मेहा घर मंगळ हुऔ, जद धारी देहा ज।
तें उणनें किधौ अमर, मेहाई महराज।।१९३
गरज पडी गाढी घणी, आवो सुणै अवाज।
आवड रूपां अंबिका, मेहाई महराज।।१९४
जाऊं हुं जोगण जठै, रिछ्या करजो राज।
सरव मनोरथ कर सुफल, मेहाई महराज।।१९५
डालामत्थै डणकतै, बाई होय बिराज।
साय करीजो शंकरी, मेहाई महराज।।१९६
डाढाळी थूं डोकरी, गाढाळी गढवां ज।
सदा साथ रह शंकरी, मेहाई महराज।।१९७
ऊंदर करजै अंब सुण, मढ रे धोडूं मांझ।
फुदक फुदक फरतौ रहूं, मेहाई महराज।।१९८
अगर मगर आखै नही, करै भळायां काज।
जोगण घण जादूगरी, मेहाई महराज।।१९९
~~वैतालिक

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