करणी मां रो आवाहण गीत – जंवाहरजी किनिया सुवाप

karni-mata-ji

किनी किम जेज इती किनीयांणी,धणियांणी नंह और धणी।
खाती आव रमंती खेला,वेळा अबखी आण बणी॥1॥
अवलंब नहिं आप विण अंबा,जगदंबा किणनै कहुं जाय।
म्हारै जोर आपरो मोटो,धाबळवाळ सुणें झट धाय॥2॥
सात दीप हिंगळाज शगत्ति,मनरंगथळ धिन माता।
सांभळ अरज कहै इम सुकवि, खेड पधारो खाता॥3॥
आवडजी री आंण इशरी,करणी जेज न कीजै।
रोग पिशाच न रहै अंग नेह्डो,देवी ओ वर दीजै॥4॥
आद अनाद शकत्त अजोनी,पाळण समरथ पातां।
परगट करो नयो परवाडो,जाय नहीं जुग जातां॥5॥
ब्रह्मा विष्णु महेश शेषवर,एको ध्यान अखंडी।
सेवग सदा जवारो शरणै,चाकर थारो चंडी॥6॥

~~जंवाहरजी किनिया सुवाप
(गाँव थूंसडा, अलवर)

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