करणी माता रा त्रिभंगी छंद – कवि डुंगर दानजी आशिया (बाळाउ)

।।दोहा।।
जांणी शिव राणी जगत, गढां सुणांणी गल्ल।
वाखाणी च्यारुं वरण, किनीयाणी करनल्ल।।1।।
रुद्राळी काळी रिधू, खैंगाळी खळ खाण।
उताळी आवै सदा, डाढाळी भर डाण।।2।।
दरणी जरणी दैत दळ, भय हरणी भुज लंब।
अशरण शरणी अम्बिका, जय करणी जगदंब।।3।।

।।छंद – त्रिभंगी।।
जय जय जग जरणी भव भय हरणी खळ दळ दरणी खग धरणी।
भू जळ खेचरणी पय निझरणी शंकर घरणी चख अरणी।
सेवक कज सरणी किरपा करणी मात प्रसरणी भुज लंबा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।1।।

किनिया कुळ जाई देवल माई पितु मेहाई घर आई।
थळ मंगळ थाई जोत जगाई मामडियाई प्रगटाई।
गुण भगतां गाई, सुरां सहाई, शुंभ खपाई निश्शुंभा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।2।।

जगडू बौपारी, जाज हंकारी, कोस हजारी, थी वारी।
तूफान तैयारी, भौ दधि भारी, तबै पुकारी, महतारी।
सुण भुजां पसारी, नाव किनारी, आप उतारी, श्री अंबा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।3।।

खाती कमठाणी, कूप खुदाणी, कीण बिठाणी, तद ताणी।
नह जोग ढळाणी, अध विच आंणी, लाव पुरांणी, लुंटांणी।
रटियो सुरराणी, हे किनियाणी, वरत संधाणी, वणि दम्बा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।4।।

कतारि सिधाया, देश पराया, नाज भराया, लदवाया।
बिच ऊंट थकाया, तूटा पाया, चौथू गाया, महमाया।
सांची सुरराया, करी सहाया, थिर पग थाया, ज्युं थम्बा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।5।।

जादम जकडाई, शेखो भाई, कैद बैठाई, मुगलाई।
तद ही भौजाई, अरज कराई, करो सहाई, थैं बाई।
मुलतान सिधाई, जैल छुडाई, शेखो ल्याई, अविलंबा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।। 6।।

कान्हा मतिहीना, कही मलीना, वादजु कीना, दुःख दीना।
तुं तौ छळ छीना, मंत्र अधीना, मै लखलीना, सगतीना।
अरि भई करीना, हथ्थळ दीना, पळमंह कीना परलंबा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।7।।

काबुल कंधारं, भूपति भारं, जंग विचारं, जैतारं।
लंघर लिय लारं, असुर अपारं, तीस हजारं, तोखारं।
सुणीयै नृप सारं, कीध पुकारं, लहो उबारं, अवलम्बा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।8।।

देशांण पधारा, नृप चढी न्यारा, शरण तिहारा, साधारा।
है राज तिहारा, वण रखवारा, आप हमारा, आधारा।
भंजण दुःख भारा, धणी धरारा, अन्त सहारा, तौ अम्बा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।9।।

भूपत दुःख भाळी, दीन दयाळी, प्रगटी काळी, परचाळी।
चण्डी चिरताळी, कह्यो कृपाळी, वाट निहाळी, मो वाळी।
आऊं ऊंताळी, तीजी ताळी, दुश्मण गाळी, दूदम्बा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।10।।

लख नव ले लारां, सिंघ सवारां, खप्पर धारां, खावारां।
कीनी किलकारां, हो हाकारां, मुगल पुकारां, हा मारां।
भग्गा दळ भारां, जैत जितारां, लाज उबारां, कर लम्बा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा।।11।।

मोरी कम मत्ती, किम बरणत्ती, मा कीरत्ती है अत्ती।
कवि डुंगर कत्थी, मुजब उकत्ती, दी सुरसत्ती, तौ प्रत्ती।
तुं सीता सत्ती, आद शगत्ती, तुं सिर रत्ती, तुं रंभा।
तारण भव तरणी वेदां वरणी जय जग जरणी जगदंबा।
जिय जय मां करणी जगदंबा जगदंबा।।12।।

।।छप्पय।।
जय जरणी जगदंब, तरण भव सागर तरणी।
भय हरणी भुज लंब, धरण अरु अंबर धरणी।
वेद वरणी अवलंब, परण अरु रही अपरणी।
दरणी शुंभ निशुंभ, करण सेवग सुख करणी।
चख अरणि घरणि शंकर चवौ, मां निझरणी तुं मधू।
दे करण चरण डुंगर दखै, शरण रखै मेहासधू।।1।।

~~कवि डुंगर दानजी आशिया (बाळाउ)

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