🌹करणी स्तुति🌹- बारहठ खेतसी (मथाणिया) कृत

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🌹करणी स्तुति🌹

🌸दोहा🌸
बिमळ देह सिंहवाहणी, ओपे कळा अखंड|
बडां बडी चहुँवै वळां, महि पताळ नभ मंड||

💐गीत जात प्रहास शाणोर💐
बिमळ देह धारियां सगत जँगळधर बिराजै, थांन देशांण श्री हाथ थाया|
उठे कवि भेजियो राव करबा अरज, जोधपुर पधारो जोगमाया||
बीनती सुणे रथ जुपायौ बेलियां, सहस फण सेलियां जदन सारा|
टैलिया बीर सुत बाजता टामका, लाख नव फेलिया ब्यूह लारां||
घूघरां तणा झरणाट हुय घमाघम, बेण रा तंत्र तरणाट बाजै|
नकीबां बोल हरणाट हुय नोबतां, गयण धर सबद गणणाट ब्राजै||
चिंतमण लधायां जांण दरसण चवूं, खल किता दधाया दैत खाया|
राव पगमंडा कर बधाया सुरांणी, अघाया भावरा आप आया|
तापियो नाथ चिडिया पबै ठौड तद, समूरथ मापियो नकूं सोधै|
अचल मेहासधू हुकम तद आपियो, जदी गढ थापियौ राव जोधै||
अवध पनरोतडै समत पनरै इळा, बाघ चढणोत रे बेद बरनी|
गेह बड भाग किनिया तणे गोत रै, कळा साजोत रै रूप करनी||
तुही दध डूबतां जिहाजां तारिया, धारियां बिलँद ब्रद तुरत धाई|
पूत रिडमाल रे भाग पाधारियां, अनेकां सारियां काज आई||
हरो अभिलाष कवि अमर री हमरकै, जोगणी बिसरो मती जाता|
कदम दे दास रो नेस पावन करो, मूझ सिर धरो धणियाप माता||
मथाण्यो भाग धिन क्रपा फुरमाबियो, तोर बाधावियो सुकव तांई|
सांभळे बिनती घाविया सुरांणी, बैठ रथ आविया उठे बाई||
आखियो जिती धर ओयण थायो इळा, सुभोजन चाखियो थाळ साथै|
ताम्रपत्र ढाकियौ चाखडा थान तळ, हतेरण राखियो आप हाथै ||
गडा पग बीगडै नहीं हरगिज गहूं, चडापड न आवै रोग चाळौ|
न फैले धडाधड लाय महमद नगर, भडाभड भवानी बोल भाळो||
गांठ मखतूल अर सिया बर बांण गिण, मेर ज्यूं अरोपा किध माई|
भांण रे उगवण थया ब्रज लीक भल, अमर नें दिया ऐ बचन आई||
बसु पूंगळपति रोकियो बावळां, दियै लप चावळां त्रास देखै|
आप जद पांवडा दीध उतावळा, सायळां करी जद राव सेखै||
कृपा अभिलाखियो जैत भिडियो कटक, तुरत कर दाखियो जोर थारां|
समर जिताडियौ सूर चंद साखियो, बीकपुर राखियो कई बारां||
कान्हियो मार खळ त्रिशूळां काळियो, कमर परताळियो जडां काढी|
पोषियो बीक रिडमाल नें पाळियो, दैत परजाळियो सेत दाढी||
त्रहू जग मिटावण बिघन तन तापरा, खपावण पाप रा मूळ खोटा|
अनेकां प्रवाडा गिणै कुण आप रा, मात धणियाप रा बिरद मोटा||
माण दइतां घणां राखसां मारणी, भखै पळ धारणी रगत भेळो|
तैं कियो सबोझल मात जग तारणी, चारणी चारणां बरण चेळो||
सोक री दसा नित मिटावण सेवगां, गुण घणा थोक री ब्रवण गाडां|
चाड त्रहु लोक री निशुँभ शुँभ बाघ चढ, डोकरी गहै खल बिकट डाढां||
इळा नभ भाळ पाताळ खप उपावण, कंपावण काळ बिकराळ केवी|
सु कर प्रतमाळ किरमाळ जुग सम्हणी, दीपै डाढाळ घंटियाळ देवी||
भांण ऊदोत रे समै पळं भोगणी, थोगणी मौत रै समद थागै|
असुर उर खोतरै मेछ आरोगणी, जोगणी जोत रै रूप जागै||
लियां नवलाख थंड सुचारण लारियां, खडग उभारियां खळां खावै|
बीदगां बिकट दुख पडै जिण बारियां, धाबळी धारियां तुरत आवै||
सांभळी सगत धरणां श्रवण सांभळे,उठे म्रत नांगळी भांण ऊगै|
आंगळी उरध कीधा घडी एक में, पांगळी बार मां मात पूगै||
ओयणां गंजणां दाहणीं गेह उर, राह सुध बुवावो सुराराया|
अमर री अराधी तिका धणियाप अब, छी ज्यूंही राख मां छत्र छाया||
साह उग्राहणी नांम आछा सुणै, तरिंद रै जेम तूं दळद तोडै|
मुणै कव खेतसी मदद तण माहरै, जनेता ताहरै न को जोडै||
चारणां बरण पर कृपा नित चोवडी, तो बडी न को मां सूळ तोलै|
दीपै अब सासणां म्रजादा दोवडी, एक इण लोवडी तणै ओल्है||

~~बारहठ खेतसी मथाणिया कृत

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