काजी ई काजी रैयग्या

अेक समै री बात । पांच मिनख आपोसरी मांय कोई बात पर उळझग्या। जिद बहस रै बिचाळै रीस में रसाण पैदा हुयो। माड़ै दिन रो फेर आयो। अेक जवानड़ै रीस ई रीस में सामलै रै कुजाग्यां दे मारी। देखतां ई देखतां सामलो चित्त। नीचै पड़्यो अर प्राण पंखेरू उडग्यो। आपरै सागलै री मौत देख बाकी च्यारूं धोळा-धप्प हुग्या। च्यारां रा मूंढा जूतां ऊं कूट्योड़ा सा। लागै जाणै बापड़ां रा माइत मरग्या हुवै। पैली जोर-जोर सूं चीख अर गाळ बकणियां अबार निसासां न्हाखै। आप जाणो कै रीस स्याणी घणी हुवै। बा तो लारली गळ्यां भाजगी। अबै च्यारूं अेक-दूजै रै सामी जोवै। च्यारां नैं लाग्यो कै सेखी नैं भातो आयग्यो। अबै तो जेळ में चाकी पीसणी पड़सी। हंसतां हंसतां कूवै में कूदण जियांकली बात हूगी। च्यारूं गतागम में फंस्योड़ा। कीं समझ नीं आ रयो। आपरी करणी पर मोकळो पिछतावो पण अबै पिछतावै सूं के बणै ? बात तो बिगड़गी।

बां च्यारां मांय सूं अेक जणो होळै सी बोल्यो जियां होसी सो देखी जासी पण अबै इण ल्हास नैं तो गेलै लगाणी पड़सी। अणजाण जाग्यां। कोई मा नां मा रो जायो अर सोई देस परायो। ल्हास नैं आपरै गाम लेज्या नीं सकै। इण खातर वां च्यारां अरथी बणाई अर सारलै गाम री भोमका कानीं टुर पड़्या। जठै आ घटना हुई, उणरै सारै ई काज्यां रो माहल्लो हो। बै च्यारूं कांधिया अरथी लियां मोहल्ले मांय कर निळण लाग्या तो उण मोहल्लै रै काज्यां सोच्या बापड़ा बारला मिनख है। गेलै चालतां घटना घटगी। आं रै सागै कोई कोनी। आ सोच’र उण मोहल्लै मांय सूं बीस-तीस काजी उण अंतिम यात्रा मांय सामल हुग्या। आपणै अठै अरथी का मैयत नैं कांधो देवण री परंपरा है। च्यार काजियां अेकै सागै ई अरथी नैं कांधो दियो अर पहली सूं लाग्योड़ा कांधियां नैं सा’रो दिरायो। च्यारां कांधियां अेक-दूजै कानी देख्यो अर आंख्यां ई आंख्यां में सैन करी। शवयात्रा होळै-होळै आगै बढ़ी। भोमका में ले जाय अरथी नीचै उतारी। अेक-दूजै सामी देख्यो। सगळा अेकदम सूं चौंक्या। बां देख्यो कै मुसाणां मांय कोरा काजी ई काजी हा। मरणियै रै सागै वाळां मांय सूं कोई कोनी। पैली अरथी उठा’र ल्याया, बां कांधियां मांय सूं अेक ई कोनी हो। बै तो मौको देखतां ई गेलै में ई पार हुग्या हा। आगै उण ल्हास रो तो क्रियाकर्म हुयो ही पण उण दिन सूं आ कैबत चाल पड़ी कै कोरा काजी ई काजी रैयग्या।

आजकालै अणूंता उंतावळा अर महत्त्वाकांक्षी लोग रोजीनां नयी-नयी योजनावां री ओपनिंग करै। कई सेवाभावी संस्थावां रै सेवाप्रकल्पां रा शुभारंभ हुवै। प्रभात फेरियां निकळै। जळूस निकाळै। अखबारां मांय खबरां अर फोटुवां छपै। बां खबरां नैं देख भोळा-स्याणां (काज्यां दांई) लोग बां री मुहिम मांय भेळा हुज्यावै अर आपरो पूरो बळ लगावै पण थोड़ा दिनां पछै ठा पड़ै कै सरूआत करणियां अर फीता कटावणियां तो आसैपासै ई कोनी। अठै तो बीच राह भेळा हुया जका काजी ई काजी बचै। उण समै आ कैबत चरितार्थ हुवै। आजकाल इयांकलो चाळो घणो है, इण खातर सावधानी जरूरी है। सावळ ध्यान कर’र सामळ हुणो अर पैली वाळा कांधियां रो पूरो ध्यान राखणो कै गेलै मांय सूं पार नीं बोलै। च्यारूं कांधा सागै बदळावण री जाग्यां अेक-अेक कांधो फोरावता तो नतीजो दूसरो होतो। खैर! बाकी तो आप सब समझदार हो।

~~डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत”

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