कैड़ी राफारोळ मची है

rafarol

रचना जग री जबर रची है,
बेमाता बेखबर पची है
इन्दर री आंख्या चकराई
सुंदर पोपां बणी सची है।
बाकी सगळा जाणबावळा,
बाळ-बाळ बेमात बची है।
सामै ऊभो साच न सूझै
झांकै उण दिस कूड़ जची है।
इणरी उणनैं उणरी इणनैं
कैड़ी राफारोळ मची है।
चोर लगावै, धणी जगावै
उणनै फोड़ै जिणमें खावै
मोटी बातां छोटै मन सूं
जग पतियारो कीकर पावै।
आज नहीं तो का’ल बदळज्या
ताल, बाल अर खाल बदळज्या
पण पोची नीयत नीं बदळै
भांवै कितरा साल बदळज्या।
एकर फेरूं पच कर देखां
इक दूजै में रचकर देखां
थारी-म्हारी खेंचा-ताणी
इणसूं एकर बचकर देखां।

~~डॉ गजादान चारण शक्तिसुत

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