केसर भवानी वंदना

🌹दोहा🌹
चेहर कर म्हौ पर महर, अहरनिशा जगदंब।
रे कल़जुग री कलपतर, भवा नमूं भुजलंब।।१
लाल धजाल़ी लाज रख, किरमाल़ी खल़ खंड।
बिरदाली बहु रूप धर, निरखै तूं नवखंड।।२
काल़ी मतवाल़ी बणी, पीवै मदप्यालीह।
हाली बिरदाल़ी हणण, दहिताँ डाढाल़ीह।।३

।।छंद त्रिभंगी।।
नाकां नथवाळी, कानां बाळी, मां मुकुटाळी कनकाळी।
सिंदूर कपाळी, कंकण वाळी, नेह निहाळी, नयणांळी।
कुम कुम सिर वाळी, लोवडियाळी, ललित लटाळी, रूप उमा।
मरतोली वाळी, लाल धजाळी, तूं ममताळी, चेहर मां।१

माता मतवाली, पीवै प्याली, बासण वाळी बिरदाळी।
डोकर डाढाळी, छिण वपु बाळी, जोबनवाळी, जोराळी।
पातक परजाल़ी, वदी वडाल़ी, नमो निराल़ी, निरमल मां।
मरतोली वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर मां।।२

डं डाक बजावै, जन जस गावै, बाल़ बुलावै, तौ आवै।
नह देर लगावै, विपत नसावै, सुख सरसावै, दुख जावै।
भगतां मन भावै, हिव हरखावै, लडू चढावै, जातर मां।।
मरतोली वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर मां।।३

सांढण घण सारी, वहै रबारी, वठै कुमारी बण आई।
कहियौ पय लारी, मनें पिलारी, भुखी भारी, हुँ भाई।
दो साँढ कुँवारी, ह्वी पय धारी, जद ह्वी थारी, पारख मां।
मरतोली वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर मां।।४

ओछब करवाया, लोग बुलाया, घण जन आया, मढ राया।
पकवान पकाया, जद कम पाया, मन मुँझाया, माँ ध्याया।
बोली बिरदायाँ, जगत जिमायाँ, परचा छाया, जन जन मां।
मरतोल़ी वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी चेहर मां।।५

ढं ढोल ढमाकं, बजै अथाकं, हाकं बाकं, ध्रूजाकं।
डं डं डं डाकं, बीर बजाकं, रैण रमाकं, नवलाखं।
खल़ करणी खाखं, मात सदाकं, रख शरणाकं, बाळक माँ।
मरतोल़ी वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर माँ।।६

कायम कल्याणी, भवा भवानी, छानी मानी, काम करे।
सुखदा वरदानी, नमो शिवानी, रीझो राणी, बाळ परे।
वसियै बण वाणी, कंठ अमाणी, सुर लय लाणी, वीणत माँ।
मरतोल़ी वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर माँ।।७

नरपत सुत ध्यावै, छंद बणावै, थनें सुणावै, जस गावै।
मन मोद करावै, माँ बिरदावै, आणंद आवै, हरखावै।
समर्याँ दुख जावै, संपत पावे, नव निध लावै, मम घर माँ।
मरतोल़ी वाल़ी, लाल धजाल़ी, तूं ममताल़ी, चेहर माँ।।८

।।कलस़ छप्पय।।
वरदानी वपु व्योम, बीसहथ रूपां वाणी।
जगजननी जगदंब, कृपा करियो कल्याँणी।
भवा, शिवा साँम्भवी, कृपाणी-खडग, खेचरी।
राजी रहियौ राज, बाल़ री नेह निर्झरी।
कामदुधा जग कलपतरु, कलियुग माँ केसर कथी।
लाधी नरपत नें ललित, मरतोल़ी भागीरथी।।

~~@नरपत आवडदान आसिया “वैतालिक”

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