खातो महाराज पदमसिंह रो साख सूरज री

सेल त्रिभागो झालियां मूंछां वांकड़ियांह।
आंखड़ियां देखां पदम सुख्यारथ घड़ियांह।।

इण दूहै रै रचणहार कवि एकदम सही कही है कै जिण बगत पदमसिंह नैं देखूं बा घड़ी सुख री होवै। बीकानेर महाराजा कर्णसिंह रा सपूत पदमसिंह महान वीर, उदार पुरुष अर क्षत्रिय गुणां सूं मंडित राजपूत हा। उदारता अर वीरता इणां नैं वंश परंपरा में मिली –

दादो रायांसिंघ है नांनो राव रतन्न।
प्रिथी वडाल़ा पदमसी दियण वडाल़ा दन्न।

उणां री वीरता विषयक घणी ई बातां इतिहास में संकलित है पण म्है उणां री अदभुत उदारता री बात बताय रैयो हूं।

मगरै रै गांव मोखां रा बीठू गोगदान रै घरै नादारगी घणी। चारण! पण कविता रो कन्नै -कन्नै ई वासो नीं। सो कुण रीझै अर कुण दातरगी करै?

घरै लुगाई समझणी अर दो आखर ई जाणै। उण कैयो “ठाला भूला कठै ई कमावण कै कोई राजेसर रीझावण जा ! आपां रा ई दिन फुरै”।

गोगदान कैयो “साधारण मजूरी म्है कर नीं सकूं अर कविता टाल़ राजेसर रीझै नहीं।”

गोगदान री जोड़ायत कैयो कै “आप पदमसिंहजी कन्नै जावो बै दातार। कोई नै ई निरास नीं करै।”

गोगदान कैयो “तोई महाराज नै म्हैं कांई रीझावूंलो?”

गोगदान री घर वाल़ी एक सौ रुपियां रो खातो लिख र दियो जिण में लिखियो “खातो १ पदमसिंह करनोत रो, अखरै रुपिया सौ। दिया वीठू गोगदान अर लिया पदमसिंह। साख सूरजदेव री।”

गतगम में फसियो गोगदान दक्षिण में महाराज पदमसिंह रै डेरै ओरंगाबाद पूगियो। लोगां पूछियो कै बाजीसा लारै घणी भांय (दूरी) आया कोई खास कारण?

गोगदान कैयो “म्है पदमसिंहजी में कदै ई रा रुपिया मांगूं सो उगरावण आयो हूं।”

आ सुण र लोगां नैं अचूंबो होयो कै जिणरै घरै ऊंदरा थड़ै करै बो बीकानेर महाराज पदमसिंह में रुपिया मांगै! खैर बात पदमसिंहजी रै कानै पड़ी कै गोगदान नाम रो कोई चारण आयो है अर आप में रुपिया उधारा मांगै! महाराज बुलायो। कामदार कन्नै सूं खातो बचायो। खातै रा सबद ऐ कै “लिया पदमसिंह अर साख सूरजदेव री।” दरबार सारी हकीकत समझग्या। उणां आपरै कामदार सूं नवो खातो लिखायो अर हर दसरावै दस रुपिया बधीक देवण अर खातो कदै ई नीं फाड़ण री आपरी ओलाद नैं तलाक घाती। इण बात नैं दयालदासजी आपरी ख्यात में लिखी है तो पदमसिंहजी रा समकालीन दिग्गज कवि तेजसी सांदू भदोरा आपरै एक गीत में ई लिखी है।

दयालदासजी लिखै “पीछै महाराज खत सुणनै गोगदान सामा जोयो अरूं फुरमायो कै ठीक है गोगदानजी रुपिया मैं लिया हा सू खत थांरो सही छै।”

उण बगत महाराज पदमसिंह, गोगदान नै १५०रुपिया, कड़ा, सिरपाव अर घोड़ो देय बहीर किया अर खातो आयो नीं कियो।तेजसी सा़ंदू आपरै गीत में जिकी ओल़ियां लिखी है बै अजंसजोग अर चारणां रै प्रति पदमसिंह री निश्छल़ अपणायत री अखी साखीधर है –

करै अरज मुख सूं कुण काढै
दूजां नैं मांगतां डरै।
तैं चढिया लाड करनावत
कव तोसूं तिण जोर करै।।
वीसी सात नगद वाटावण
वधता वल़ै अधेली व्याज।
दसरावै- दसरावै दीजै
अणफट मामलो आज।।

वहा रै पदमसिंह थारी वीरता अर दातारगी री बातां आज ई ढलत़ी रातां गीतां अर कविता में गाईजती इण दूहै नैं सार्थकता प्रदान करे-

अत्थ जिकां दी आपणी हरख गरीबां हत्थ।
गाईजै जस गीतड़ां तांत तणकां सत्थ।।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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