खोडल थारां बाळरी

खोडल थारां बाळरी, बाई करजे बाळ।
चढ झट आ घडियाळ पर, टाळ विघन ततकाळ॥1

खोडल के खोडी भई, या भूली थुं वाट।
‘बाळक रे बिपदा पडी, मेट आय गभराट॥2

खोडल थुं बेठी कठे, कुकुं कर कर साद।
बाळकियारी कर बळण, आई हरो अवसाद॥3

खोडल क्युं बोळी बणी, मारी वेळा मात।
माफ करो माजी हमे म्हारा थै अपराध॥4

खोडल थुं हरदम आयनें, आफत हरती अंब।
पण नरपत री वेळ क्युं, आई कियो विलम्ब॥5

खोडल थैं कीधी खरी, डरी देख मम दुःख।
पडी जदे विसमी विपत, मां न दिखायो मुख॥6

खोडल छोड अबोलडा, कर छोरु संग बात।
माता व्हे रुठी रहो, ओ नह आछी बात॥7

खोडल थुं रुठे मती, सब जग भल रुठेह।
जग रुठ्यां थां आशरो, थां रुठ्यां नह छेह॥8

खोडल भांगो खोड सब, फना करो सब फंद।
हरो नरपत री वेदना, अरपो मां आनंद॥9

~~नरपत आसिया “वैतालिक”

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