खोडियार मां रो डिंगळ गीत – कवि दादूदान प्रतापदान मीसण

कवि दादूदान परतापदान मीसण रो कहियोडो खोडियार मां रो डिंगळ गीत।
Khodiyar Ma

गुण कथां हुं गांगडियाळी।
महेर करे मां मामडियाळी।

तट हिरण रे वासो थारो।
धरो गाजै जठै इक धारो
तरवर फूलां वास तिहारो।
महके वायु रो मंहकारो॥1॥
झरणां मह झणकार करै थुं।
नीर विच घेरो नाद करे थुं
वगडा मंह वनराई घटा थुं।
लाल गुलाबी वेलि लता थुं॥2॥
तरवर री कुंपळियां तुं हो।
फोरम फागणिया री तुं हो।
केसुडां री कळियां तुं हो।
पीळी पट आवळियां तुं हो॥3॥
वायु रुप विचरती वन मंह।
थानक मंह धर मंह थन थन मंह।
गाजै बरखा नीर गगन मंह।
आहूत ज्वाळा मांहि अगन मंह॥4॥
जाप जपां तो होय जगन मंह।
लगन लगी तो हुवै लगन मंह।
पैठी तुं सरगां पाताळै।
भुवण तीन थुं निजरां भाळै॥5॥
साद करंता सदा सहाई।
धाबळवाळ धोडती धाई।
करडी क्रोधां निजर करे तो।
काळ पगलियां पाछां भरतो॥6॥
आण फरै सुरज नंह उगै।
पंथ तिहारै कोई नी पूगै।
खोडल थारां तरशूळ खखडै।
गढ गिरनार मूळ सूं गगडै॥7॥
दिगपाळां रा छेडा छूटै।
टाणां बिण मेहूलियो बूठै।
विजळियां रा हुय लवकारा।
जग मंह हो बाधै झबकारा॥8॥
कोरंभ पीठां होय कडाका।
भुमंडळ मंह हुवै भडाका।
शेषां सिर सळवळबा लागै।
लावा रस उकळवा लागै॥9॥
सूरज चंदा तेज समेटै।
हरि ब्रहमा शिव उतरे हेठै।
महरामण मरजादा मुकै।
हरियल ठारो ठार ही हूंकै॥10॥
अवळी चाले होय अटंकी।
बिरदाळी होय जाव छ बंकी।
रीस भर्योडी उतरी रण मंह।
क्रोध भरी उठै कण कण मंह॥11॥
हिवड़ै सूं जद हेत बछूटै।
तिणनै जग मंह कोई न लूंटै।
म्हेर करै तो कोई मरे नंह।
भूंडां डगला कदे भरे नंह॥12॥
वण जोइतो कोई वैर करे नंह।
कूटाळा कंकास करे नंह।
जीभां खोडल जपतां जपतां।
रांम नाम हुवै वो रटतां॥13॥
अंतस री जाणण तुं आई।
बेली व्हैजै वेगी बाई।
खरी वेळ थै खप नी आवै।
(तौ)आई दूजा कुण वाहर आवै॥14॥
बिरद तुहाळौ केम बखाणुं।
जोगण झाझी वात नी जाणुं।
काला व्हाला करतां करतां।
हरदम थारै चरणां नमतां॥॥15॥
काळे बुध्धि बेर करी है।
भीतर मन मंह लाख भरी है।
हिवडै वाळी होठ न आवै।
शकति “दाद” किंयां समझावै॥16॥
आठूं जाम भजो मन अंबा।
जगबंधण काटण जगदंबा।
प्रात उठ जो लागै पाये।
जलम जलम रा पातक जाये॥17॥
कर जोडजे दातण करतां।
भज मन खोडल डिग मांडंतां।
उठत बैठत नाम उचारै।
दुःख दाळद मां सारा डारै॥18॥
खोडल जद करसी खमकारा।
चित मंह होसी तद चमकारा।
बणी नंही है मां थुं बहरी।
बाळ तिहारां लेजै तेडी॥19॥
अमी नजर जद आप हुवैला।
पळ छिन काळ पणां ठहरैला।
खोडल मां ताहरे खमकारै।
शारद पाछा लेख सुधारै॥20॥
घडी एक मत रुकै अंबा।
झट वाहर आवै जगदंबा।
पचाण हुवै या हो पगपाळी।
धाजै झट पट धाबळवाळी॥21॥
खपर त्रशूळ खडखडा खोडल।
अळगी करै मंढ री औझल।
कांई विलंब हवे मत करजै।

~~कवि दादूदान प्रतापदान मीसण

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *