खोडियार माताजी री स्तुति – हेमुजी चारण

।।दोहा।।
माता मो वाणी विमळ, सिधि देजे सुरराय।
“हेमु” खोडल रे हुकम, आखे छंद उपाय।।1।।
हिरा जडीत सु कंचवो, कर वाजा कोमंड।
बुध्ध प्रमाणे वरणवु, महल प्रवाळ श्री मंड।।2।।

।।छंद – नाराच।।
प्रवाळ नंग धाम पें, बणे सु गोख छब्बियं।
जळे सु जोत है ऊधोत, कोटीरुप से कियं।
अरक्कजा सुधा अगे, चडे सिंदुर चाचरी।
नमो सगत्त नित, नृत्त खोडली रमे खरी।।1।।

झळ्ळक झाल झुलणा, सु हार नंग हेरियं।
कटाव कोर कंचुवो, दिपे सु हेम दोरीयं।
घणा सु फेर फेर घेर, नृत बाज नेवरी।
नमो सगत्त नित्त, नृत्त खोडली रमे खरी।।2।।

ॐबणे सु बेण नागबंध, रुप रिध्ध रंगरी।
भळक्क नथ चुड हथ्थ, है अमोल अंगरी।
जडाव खोल है अमोल, झगै सु नंग गुजरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।3।।

मृदंग ताळ झल्लराळ, भुंगळं सु भेरीयं।
बजे त्रंबाळ ढोल, झांझ कंठ ताळ फेरियं।
डहक्क डक्क डमरु, छतीस ए समोहरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।4।।

खरे त्रिभंग खप्परं, कसे कटार कम्मरं।
कबाण ले त्रिशुळ को, खडग्ग ढाल खंजरं।
सजे आयुध छत्रिसों, पलाण सिंह पाखरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।5।।

चळे सु भुत प्रैत दैत, जुथ्थ जोगणी।
मुनिंद्र संत मंत्र के, त्रहंत हे त्रिलोकणी।
भजंत भाव भुपती, करंत सेव चाकरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।6।।

बजंत जंत्र तंत्र बीण, मंत्र ताळ मेळियं।
जळंत झुळ है दुकुळ, सगत्त यो समेळियं।
बणाव हीर चीर बंध, ओपे सुं सिध्ध ईशरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।7।।

भू मंडळं रवाज साज, तंबुरं सतारियं।
संगीत गीत माथ या, भणंक वात भारीयं।
उमंग चंग रंगीए, खडं खडंत खंजरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।8।।

सरक्क शेष भु धरक्क, बीर हक्क बाजीयं।
हुए कहक्क हक्कमें, गरक्क धक्क गाजीयं।
फरक्क मेर फेर में, घमं घमंत घुघरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।9

पेसे पाताळ तेण ताळ, लंगडी कळा लहे।
राखे फणाळ खप्पराळ, पुहर नाग ने प्रहे।
अमृत वाळ नेवरी, उतार खेल आपरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।10।।

उपुर पाट घाट एथ, जे प्रदेश जाईअं।
समर्थ नित्त धर्म, संत पख्ख रे सहाईअं।
खेलंत लोह खेचरी, टाळे विघन्न शंकरी।
नमो सगत्त नित्त नृत्त खोडली रमे खरी।।

।।छप्पय।।
रमे सु खोडलराय, साय करवा सेवक गण।
रमे सु खोडलराय, भडे दहितां ध्रु भंजण।
रमे सु खोडलराय, सिंह वाहण सखराळी।
रमे सु खोडलराय, त्रिलोकां हेकण ताळी।
रमवा सु रास इणविध रचे, झुळ सगत रथ जोडली।
करजोड पुत्र”हेमु” कहे, खरी प्रसन्न होय खोडली।।
सब दहितां सहारवा, सेवग करण सहाय।
करजोड पुत्र”हेमु” कहे, रमे सु खोडलराय।

~~हेमुजी चारण
प्रेषित: मुरारदानजी सुरतांणिया (मोरझर कच्छ)

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