खोडियार माताजी रो सपाखरु गीत – पुष्पेन्द्र जुगतावत

खोडियार माताजी रो सपाखरु गीत
(रचयिता: पुष्पेन्द्र जुगतावत, गाँव पारलाउ)

हंसावाहणी नमावौ शीश मां तणी आशिश हेर,
बेर अणी कुळांदेवी नमूं बार बार।
चारणां उबार मार पापियां तणा समूह
खळ दळ खपावणी खंग खोडियार॥1॥

सोहंता त्रशूळ हाथ साथ मै कृपाण शंख,
पंख रे प्रमाण माता पेखतो पयांण।
जाण अग्नि पंख सीत भीत वै कुमाण जळो
मात नमूं शीश मक्र वाहणी महाण॥2॥

मारुधरां तणी बात बणी हणां घणी भोळी,
इळा मै वैवार नाॅह शीळ ना आचार।
खार जात तणी छणी तरां डील मांहि खोट,
आओ नी खोडल्ल आई आपरो आधार॥3॥

बाळ बणै विज्ञ और जोधारा जवान बणै,
प्रोढ व्है कमठ्ठ वृद्ध नीती रा प्रवीण।
नार व्है सुशील सत्त भाखणां कविश नित्त,
औळखै प्रजानूं पुत्र भूपति अधीण॥4॥

मात दियै प्रीत हिये जिये जुध्ध अमी मौत,
जोत किए जात तमीं से प्रथम्म जाण।
आंण कुळां तणी राख साख नूं नखंडै ईम,
खेम हेत किया पुष्प छंद मै बखाण॥5॥

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