किनियाणी करनल्ल!!

karnimata

पाप हरण जग जणण पुनि, दरण दूठ दाकल्ल।
करण काज दुख काटणी, किनियाणी करनल्ल!!1
धिन जंगल राखी धरा, सात्रव सारा सल्ल।
मंगल़ करणी मावडी, किनियाणी करनल्ल!!2
अहर निसा रख महर इम, गहर रखी धर गल्ल।
आवै हेलै आध सूं, किनियाणी करनल्ल!!3
परी करै पातक सबै, हरि चढ आवै हल्ल।
धरि आपरां ध्यान धुर, किनियाणी करनल्ल!!4
छाया लोहड़ छतर जिम, प्रात-रात हर पल्ल।
पात मात नित पाल़णी, किनियाणी करनल्ल!! 5
मोचण सांसो मावड़ी, भाव दैणी उर भल्ल।
चाव बढावण चाड सुण, किनियाणी करनल्ल!!6
मात तुरत दुख मेटणी, करै नको अज-कल्ल।
भगत !सगत नह भूलणी, किनियाणी करनल्ल!!7
बीजां रै विसवास पर, इम नह रैय अवल्ल।
राज ओट निज राखणी, किनियाणी करनल्ल!!8
वीसहथी उर वछल़ता, निजपण नित निहचल्ल।
रीझ स्नेह धिन राखणी, किनियाणी करनल्ल!!9
काया संकट कापणी, अँतस रख अवचल्ल।
दास खास आभास दे, किनियाणी करनल्ल!!10
रोग -सोग सब दूर रख, जणणी बांहां झल्ल।
एको कल़जुग आसरो, किनियाणी करनल्ल!!11
~~गिरधर दान रतनू “दासोड़ी”

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