कितरा धृतराष्ट्र ?

कितरा धृतराष्ट्र ?
लागै है डर
साच नै साच कैवण सूं
जोखिम रो काम है
साच रै सैमूंडै ऊभणो
साच नै आंच नीं!
आ बात साव कूड़ी लागै है
क्यूंकै
जद जद ई हुयो है
किणी रो साच सूं सैंमूंडो
तो ऊतरी है
मूंडै री आब
कै खायग्यो ताव मूंडो
भलांई आप मत मानो
पण साच नै पचावणो
गरल़ सूं ई दोरो है
भलांई केई
भोल़िया भाई
कैवता धीजो धरै है कै
साचै ! राचै रांम!
पण
जद चरै गोधा
अर कूटीजै पाडा!
तो लागै जाणै
राम नाम सत हुयग्यो हुवै!
कांई आपनै
अजै ई पतियारो है
कै
मिनखां में
राम रो वासो है ?
नीं,
आप ई लागै है
कै दिगूंपिचू हो
कै जे कठै ई
राम हुतो तो
नागो नाच
करण सूं
सकपकीजता लोग
पण राम निसरग्यो
जदै ई तो
साच असह्यो हुयग्यो
नीं पचाईज्यो साच
आज तक किणी सूं
कांई पांचाल़ी कूड़ी ही?
नीं उण साच ई तो कह्यी
पण
पची कठै
मिजल़ै मिनखां
उणरो ले लीधो माजनो
फकत साच बोलण सारू
अर आंधो घसीड़ !
सुणतो रह्यो
उणरा कारोल़िया!
कांई आप मानो
कै बो आंधियो
जुगां पैली
सिंहासण रै
मोह रो बिख बीज
बोयर गयो हो
बो आंधो
धृतराष्ट्र अबै नीं रह्यो
नीं ऐड़ै भरम में
मत रैजो
उण बिख विरछ
री डाल़ी डाल़ी
बोलण वाल़ी
ऐ कोचरड्यां
उण धृतराष्ट्र
री तो ओलाद है!!
जद ई तो
इणांनै
नीं सुणीजै
आबरू रुखाल़ण रा
जतन करती
कूकती द्रोपदी
अर
नीं दीखै
इणांनै
कै
भाई रा सल़ काढतो भाई!
क्यूंकै
ऐ तो फखत
वोटां रै ओखादरै
माथै लड़ता रैवै
गिरजड़ां री गल़ाई।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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