कुबद्ध कमाई छोड बावल़ा!

कुबद्ध कमाई छोड बावल़ा!
मतकर भ्रष्टां होड बावल़ा!!
च्यार दिनां री देख चांदणी!
फैंगर मतकर कोड बावल़ा!!

लुकै नहीं अपराध लाखविध!
कूटीजै फिर भोड बावल़ा!!
लोकतंत्र में बिनां दावणै,
लेय तपड़का तोड बावल़ा!

ज्यांरो होको ज्यांरी खेती!
मती तोड़ाजै गोड बावल़ा!
कातर है कानून बापड़ो,
समझ वापरी डोढ बावल़ा!!

हंसां वानै मत चकराए
बेड़ै बेड़ै डोड बावल़ा!!
संविधान रो शंको किणनै?
चवड़ै पकड़ै थोड बावल़ा!!

~~गिरधर दान रतनू “दासोड़ी”

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