कुळ चारण लुळ नमन करै

हल़्दीघाटी अर स्वतंत्रता आंदोलन रै सौदा सूरां नैं समर्पित एक छंद

किन्हीं राजस्थानी कवि ने माओं को संबोधित करते हुए कहा है कि अगर उनके लड़के में बारह वर्ष में बुद्धि चातुर्य, सोलह में कला यानी शक्ति और बीस में बडप्पन नहीं आता है तो फिर भविष्य में उसे अपने लड़के से सभी उम्मीदें छोड़ देनी चाहिए यानी गैली वाट न जोय! लेकिन हमारे यहां ऐसे मनीषी हुए हैं जिन्होंने फूटती मूंछों के साथ ही इतना सुयश अर्जित कर लिया कि उनके पीछे सदियों उस सुयश-सौरभ से गौरान्वित, आल्हादित हुआ जा सकता है।

काम करने के लिए वय की नहीं आत्मविश्वास व आत्माभिमान की आवश्यकता है। जिस व्यक्तित्व में यह बातें होती है वे ही संसार में सुयश अक्षुण्ण छोड़कर स्वर्गारोहण करते है।

ऐसे ही महान क्रांतिकारियों की अग्रपंक्ति में नाम आता है कुंवर प्रतापसिंह बारहठ का। जिनकी २४ मई को पुण्यतिथि व जयंती दोनों है।

इस वीर ने मात्र 25वर्ष की उम्र में वो कर दिखाया जो लंबी वय लेने वाले किंचितमात्र भी नहीं कर सके।
महात्मा ईसरदासजी ने कहा था-

मरदां मरणो हक्क है, उबरसी गल्लांह।
सापुरसां रा जीवणा, थोड़ा ई भल्लांह।।

यानी जो गंभीर धीर व वीर पुरुष होते हैं उन्हें इस असार संसार में ज्यादा जीवित नहीं रहना चाहिए। उन्हें तो अपनी गौरव गाथाएं आदर्श के रूप में इस धरती पर अमिट छोड़ने हेतु गौरवशाली मृत्यु का वरण कर लेना चाहिए। और प्रतापसिंह बारहठ ने यही किया। उन्होंने इससे बढ़कर किया। क्योंकि किसी कवि ने वीर पुरुष के लिए 25वर्ष से ऊपर जीना त्याज्य माना है। इस बात को ध्येय वाक्य मानकर दिनांक 24/5/1918 में मात्र 25वर्ष की वय में ही भारत माता के चरणों में अपनी इहलीला समर्पित करदी थी। यानी 24/5/1893 जन्म व 24/5/1918 में मृत्यु का आलिंगन-

मरदां मरणो हक्क है, मगर पच्चीसी मांय।
महलां रोवै गोरड़ी, मरद हथायां मांय।।

यही नहीं इस सपूत के समग्र पूर्वजों ने मातृभूमि के हितार्थ व स्वाभिमान की रक्षार्थ सदैव अपने आप को न्यौछावर किया था।
बारूजी सौदा की इस उज्ज्वल ओद में जसाजी व केसोजी सौदा ने हल्दीघाटी के मैंदान में तो नरपालजी सौदा ने जगदीश मंदिर जिसे दाणैराव का मंदिर भी कहा जाता है उसकी व उदयपुर के गढ की रक्षार्थ लड़ते हुए वीरगति का वरण किया।
इसके साथ ही कई बलिदानी वीरों की वदान्य वीरता से फहराई गई यश पताका आज भी आकाश में फहराती हुई इस बलिदानी परिवार की देशभक्ति की अनुरक्ति की साक्षी है। कृष्णसिंह बारहठ, केसरीसिंह बारहठ, किशोरसिंह, जोरावरसिंह के साथ ही प्रतापसिंह बारहठ की गौरवानुभूति दिलाने वाली इस परंपरा को स्मरण कर आज हर भारतीय श्रद्धावनत है–

कुळ चारण लुळ नमन करै

।।दूहा।।
सूरज सौदा साख रा, इळ अह बात अख्यात।
नरो केहरो निडर नर, पातल जोरो पात।1
मरण देस हित में मुदै, रही आद घर रीत।
गावै सौदां रा गुणी, गुमर सुमर नै गीत।2

।।छंद – रेंणकी।।
पातल रै उपर पातसा अकबर
दूठ जदै गज ठेल दिया।
सधरै पिंडपाण साहस सूं सूरै
लेस बीह बिन झेल लिया।
सौदा तिण दीह वंस रा सूरज
केसव जसियो मरण करै
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।1

आयो पतसाह उदैपुर उपर
तण ओरंग तिणवार तठै।
इकलिंग दीवाण आपरो आसण
झट तजियो जिणवार जठै
मरबा निज पोळ मरट रख मांटी
निडर रोपिया पाव नरै
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।2

जगदीसर मंदर थांभ पग जाडो
हेतव आडो आप हुवो।
पातव द्रढ भाव सनातन पूरै
वाट मरण री हाट बुवो।
राखी इणभांत सपूती रेणव
खाग पाण सूं माण खरै
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।3

पसर्या फिरंगाण देस में पेखो
चहुवळ एको धार चली।
भूपां रो मरट भांगियो भूरां
भटकै दाबी भोम भली।
गौरव रा बींद बण्या जद गढवी
उरधर साहस यूँ अजरै
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।4

किसनै रा पूत बहिया मग करड़ै
सूर मिलण जमराण सजै
आजादी काज हुवा झट आगल
ताज अनै सुखसाज तजै।
केहर नै जबर जोरड़ो कवियण
दोयण जिणरी मीट डरै।
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।5

पटक्यो बंम जाय दिल्ली में पाटक
होरडिंग पर आप हथां।
धूज्या दिल मांय भूरिया धूरत
संकी सुणनै खबर सत्ता
जोरावर जोर करी हद जोरां
गोरां जावण करी घरै।
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।6

केहर ज्यूं गाज करी हद केहर
कलम रूप किरपाण करी।
भरियो कड़पाण आखरां भाणव
खट चढिया जन खरोखरी।
मन में खा खार भूरियां मद में
ताकव जड़ियो जेळ तरै।
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।7

अरप्यो निज पूत आजादी जिग में
जग सारो जस मांड जपै।
पातल बड रतन वतन रै पाळै
आगल हुय निज गात अपै
माता सम रूप मात भू मानर
ध्यान सेव में अडग धरै।
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।8

सहिया अणपार सूरमै संकट
कथन हीणपण नह कथिया।
लायो नह लेस लोभ वो लालच
दाम गांम ठुकराय दिया।
निछरावळ निडर देस रै नामै
साच बात परताप सिरै।
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।9

किसनावत भ्रात जोरड़ो केहर
हेत देस बलिदान हुवा।
अंजसै ज्यां पाण जात सह अवनी
वीरत रा बाखाण बुवा।
प्रणमै परताप गीध कवि पूरण
भाव रेंणकी छंद भरै।
सौदा परिवार सिरोमण सारै
कुळ चारण लुळ नमन करै।।10

।।कवत्त।।
आयो अकबरसाह, राण पातल पर रूठै।
जैसो केसव जोर, मूवा खग झाली मूठै।
आयो ओरंगसाह, खंडण उदियापुर खागै।
नरो पोळ कज निडर, ईहग पड़ियो सब आगै।
केसरो जोर किसनै तणा, गरब गोरां रो गाळियो।
परताप पूत केसर पुणां, भाळ सगो मग भाळियो।।

~~कवि गिरधर दान रतनू “दासोडी”

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