माँ दुगाय जी की आरती


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।।माँ दुगाय जी की आरती।।

कुलदेवी दुर्गाय आरती थाँरी
आरतड़ियाँ उजास मन रो हिवड़े रो परकास
झिलमिल जोत जगे सुरराया थारों ही से जी आस
कुलदेवी मैया आरती थाँरी
माँ दुर्गाय जी हो आरती थाँरी

आढ़ाँ री रिछपाल रहीजो सबाँ रे सदा हित माय
पांचेटिये में आप बिराजो महलां मढ थरपाय
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी

अष्ट कमल सो ही दीप बणाया भाव रो घिरत घलाय
बाती जीवन डोर री माँ झिलमिल देय जगाय
दुर्गाय माता आरती थाँरी

ज्यों देखूँ ज्यों फूटरा मैया सोळइयों सिणगार
खड़ग खपर कर माही साजे मृगपत री असवार
कुलदेवी माता आरती थाँरी
सकळा ही भारी सुरराइ सगती अंत न पार
दुरसावत थारी शरण में सोरा निर्भय रहत अपार
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी

सैस्त्र सूरज कोटि चन्द्रमा तारा नवलख आप
थाँरी कळा सूँ चमक रया अर अडिग थाँरे परताप
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी
कुलदेवी मैया आरती थाँरी

कुलदेवी बगसाओ कँवराँ ने ओहदो अर सनमान
दुरसा कुळ जग में हद चावो एक तिहारे ताण
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी

कुलदेवी सामिल रही म्हारे दिवस रेण परभात
अमर चूंदड़ी अवचल चुड़ला राखो सिर पर हाथ
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी
जग जननी मैया आरती थाँरी

तोर अपार दया सूं दुरसा गढ़पतिया कहलाय
थारे पसाय जुगां सूं कीरत भाट रया बिड़दाय
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी
म्हारी कुलदेवी हे आरती थाँरी

जीमण भोग बत्तीस भवानी झारी नीर री
मोहनसुता दीवानी गावे श्यामा हीर री
माँ कुलदेवी हे आरती थाँरी
जग जननी मैया आरती थाँरी
दुर्गाय माता आरती थाँरी

~~रत्नावली चारण “मोहनसुता”

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