मां सूं अरदास -गिरधारी दान रामपुरिया

छंद – मोतीदाम

रटूं दिन रात जपूं तुझ जाप,
अरूं कुण नाद सुणै बिन आप
नहीं कछु हाथ करे किह जीव,
सजीव सजीव सजीव सजीव ।।1

लियां तुझ नांम मिटे सब पीर ,
पङी मझ नाव लगे झट तीर ।
तरै तरणीह कियां तुझ याद ,
मृजाद मृजाद मृजाद मृजाद ।।2

मया हम मूढ न जाणत काय,
करें विनती तव हे वरदाय ।
दया कर ज्ञान करो बखसीस,
अशीष अशीष अशीष अशीष ।।3
सदा सब संकट मेटणहार ,
चहूं चरणां चही पार उतार ।
तुही करणीह मया मुझ तार,
पधार पधार पधार पधार।।4

चली दिश चार हवा अति जोर,
मिटी मरजाद दिखे चहुओर
उमा तुझ आय ही कोय उपाय,
बचाय बचाय बचाय बचाय ।।5

पङी विपदा जद राज पृथीव,
हुवो हुकमांण लगे नह जीव ।
सहाय करो मुझ आपज आय ,
सहाय सहाय सहाय सहाय ।।6

धरे धरणी तुझ लाखज लोग ,
लियो अवतार मया हित लोक
किया निज हाथ घणा खळ खंड ,
प्रचंड प्रचंड प्रचंड प्रचंड ।।7

करी गलतीह घणीज कपूत ,
अबे मन जाय जगीह अणूंत ।
हमें रख टेर सुणो मम हेल ,
अबेल अबेल अबेल अबेल ।।8

करो मुझ काब मया कर मेर,
फिरूं मढ मांह घणो चहु फेर ।
लुटू तव पांव लगी रह लेर ,
सवेर सवेर सवेर सवेर ।।9

जगा मम हींय करूं सत काम ,
नमूं तुझ मात रटूं तुझ नाम ।
कहे कर जोङ मया तुझ बाल ,
कृपाल कृपाल कृपाल कृपाल ।।10

~~गिरधारी दान रामपुरिया

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