मालण माताजी रा त्रिभंगी छंद – कवि डा. शक्तिदान कविया

डिंगळ भाषा विधमान वटवृक्ष डा शक्ति दानजी कविया गांव बिराई रा कहियोडा मालण माताजी रा त्रिभंगी छंद।
malanmataji1

।।दोहा।।
देवी दूलाईह, सुरराई शगत्यां शिरै।
मालण मंहमाईह, वसै विराई विसहथ।।

।।छंद – त्रिभंगी।।
देवी दूलाई, अंबे आई, परचां छाई प्रभुताई।
पावक प्रजाळाई, उठर आई, पग अरुणाई, प्रगटाई।
बाळापण बाई अम्ब उपाई पुनि पलटाई नींब प्रथी।
मालण महामाई, सदा सहाई, है सुरराई विशहथी।
जिय है वरदाई विशहथी॥1॥
टीकम टणकाई सुजस सवाई पह परणाई तिण पुलही।
गायां घेराई सिंध सराई वाहर धाई बिलकुल ही।
कव जीत कराई हुतब हलाई जमदढ खाई गळै जथी।
मालण महमाई सदा सहाई है सुरराई वीसहथी।
जिय है वरदाई वीसहथी॥2॥
भांडु भौजाई कुवध कहाई सुण रीसाई सुरराई।
वछडा जुतवाई आतुर आई वास बिराई वरदाई।
जळ देह जळाई सुख सरसाई सगत्यां लाई झुळ सथी।
मालण मंहमाई सदा सहाई है सुरराई वीसहथी।
जिय है वरदाई वीसहथी॥3॥
सेवग सरणाई वंश वधाई इज्जत पाई इधकाई।
थळ मंह जळ थाई साख सवाई थान थपाई थिरताई।
सुख संप सदाई आपै आई नव निध थाई कमी नथी।
मालण मंहमाई सदा सहाई है सुरराई वीसहथी।
जिय है वरदाई वीसहथी॥4॥
सिंह वाहण शगति परचां प्रगति थित अणथगति प्रभा थई।
लख थांनक लगती जोत सु जगती भाणव भगति सुफल भई।
उर माफक उगति, जस कर जुगति कविये शगति दान कथी।
मालण मंहमाई सदा सहाई है सुरराई वीसहथी।
जिय है वरदाई वीसहथी॥5॥

।।छप्पय।।
मालणदे मंहमाय, वीसहथ अंब वडाळी।
सगत प्रवाडा सांच, दया करणी डाढाळी।
भांडू पीहर भाव, वसू सासरो बिराई।
उपर करण उबेल, मात चावी मंहमाई।
है जितै सगत आलाहरी, दूलसुता सी देवियां।
सेवगां मिळै नव निध सदा, साचै मनसूं सेविया॥1॥

~~डा. शक्तिदान कविया

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