महादेव महिमा – डूंगर दान जी आसिया, बालाऊ

।।दोहा।।
परचा सूरेसर प्रगट, चरचा घर घर छाय।
हर हर सिमरै हेत सूं, (तो)संकर रहै सहाय।।१
गिर अंदर कंदर गहर, सिव मंदर सूरेस।
एहो सुंदर है अवर, आबू पर अचलेस।।२

।।छंद – त्रिभंगी।।
आबू अचलेसर, तूं तांबेसर, ओम सिधेसर, अखिलेसर।
पूजै पिपलेसर, नमै नरेसर, चन्नण केसर, चरचै सर।
हर श्री हल़देसर, सिव रामेसर, दुख दालेदर, दूर दफै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।१

उमया अरधंगा, सिव रे संगा, गल़ै भुजंगा, सिर गंगा।
भव पीवै भंगा, मन मातंगा, रुड़त अफंगा, मरदंगा।
नृत तांडव नंगा, है हुड़दंगा, चरित अढंगा, नांय छिपै।।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।२

मंदर नग माल़ा, बण्यो बिचाल़ा, भवन विशाल़ा भुरजाल़ा।
टूंका टणकाल़ा, निपट निराल़ा, रक्त धजाल़ा, रूपाल़ा।
दरसण सुख दाल़ा, कस्ट कराल़ा, कल़ि रा जाल़ा, पाप कपै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।३

नित देव निवाजै, वाजा वाजै, घोर अवाजै घण लाजै।
गहरी धुन गाजै, संखा साजै, झालर ताजै, झणणाजै।
रूंखां थट राजै, वीच विराजै, थांन दराजै, मांय थपै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।४

सुमिरै इल़ सारी, नर अरु नारी, तूं त्रिपुरारी, भव तारी।
थिर पूजा थारी, करै कंवारी, सांझ सवारी, सुखकारी।
पावै वर प्यारी, धन अन धारी, खल़ विभिचारी, दुस्ट खपै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।५

आसा लै आवै, नाक निमावै, भजन सुणावै, मन भावै।
गुण सिव रा गावै, थिर जस थावै, पूत रमावै, वर पावै।
लिछमी घर लावै, मौज मनावै, दु:ख नसावै, सुक्ख दपै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।६

संकर री सेवा, हुवै जु हेवा, मिल़ै कलेवा, नित मेवा।
जगदीसर जैवा, ध्यान धरेवा, दु:ख हरेवा, सिव देवा।
कुंण जांण सकेवा, भव रा भेवा, तपसी ऐवा, ताप तपै।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।७

मुख सहस मंडाई, गुण नित गाई, पार न पाई, प्रभुताई।
ज्यां ईस जचाई, उकत उपाई, कवी वणाई, कविताई।
सिव रहै सहाई, भज लौ भाई, आप सदाई सुक्ख अपै।।
संकर सूरेसर, भव भूतेसर, जय जोगेसर, नांम जपै।।
(जिय)जग हर हर हर जाप जपै।।८

।।छप्पय।।
जन कोई हर रा जाप, जकौ मन साचै जप्पै।
तन रो मिट ज्या ताप, कल़ू रा पाप जु कप्पै।।
थिर जस देवै थाप, आप धंन धीणा अप्पै।
मौज वधै अणमाप, सकल़ सुख घणा समप्पै।
देवाधि देव महादेव री, कवि डूंगर महिमा करै।
इण लोक तथा उण लोक रा, सकल़ काज ज्यां सूं सरै।।

~~©डूंगर दान जी आसिया, बालाऊ

जालोर शहर से 4/5 कोस दूर सूरेसर के पहाड़ पर गूफा में पुराना शिव मंदिर है। जो सूरेश्वर महादेव के नाम से प्रख्यात।

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