महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल-वीसाभाई महडू

मोगल माताजी री स्तुति

।।दोहा।।

आद शकत व्रण उजळी, खत्रवट उजळ ख्यात।
गुण उजळ सामंद्रगत, मोगल उजळ मात।।1
मछराळी देवां मुगट, सत उजळ परसिध्ध।
महादेवी जग मांहि थें, केक प्रवाडा किध्ध।।2
परचां देव प्रमाणवां, सघळां रच्यो समास।
जूनां महलां जळहळयां, प्रगटया दीप प्रकाश।।3
मोरबियां बाबी मरद, सहबळ राचे सोय।
चारण तणी चकासणी, करवा हाल्यो कोय।।4
सहबळ कोप्यो सोखडे, जोमी रोष जगाय।
त्रिजे डगलां त्राटके, मार्यो महलां मांय।।5
रुपां रे परचे रही, समरथ दीधो सांच।
ओखा बावळनूं अकळ, नचव्यां तांडव नाच।।6
मोंसाळे कोटक मणी, तात सुरांसुर ताम।
व्रहमंडां किरत वधी, नवखंडां थिर नाम।।7
उजळ कुळ गंगेव अळ, उजळ माप अटल्ल।
गढवी घांघणिया तणी, मछराळी मोगल्ल।।8
भुज कांकण सिर भेळियो, सांधण नेत्र सुधार।
पाको तेल फुलेल पट, सो मोगल शिणगार।।9
कुळजगरी थाती क्रिया, माठा हुआ सुरमाप।
अवरीली जग उपरां, अळकण देवी आप।।10
फरी आंण फिरंगांणरी, देव गया दुरंगाण।
मछराळी मां उण वखत, परचा दियण प्रमाण।।11

।।छंद – रोमकंद।।

परचा जग वासिय नक्ख प्रकाशिय रध्ध हुलासिय, अंग रयं।
त्रमळं गुण गासिय, सुक्ख निवासिय, उजळ आशिय, चाव अयं।
वरदाण विळासिय, दुःख विनासिय, साम चौरासिय, जग्ग सरे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।1

निज वेश उजळ्ळ झळोमळ त्रम्मळ, रुप अप्रब्बळ तेज रजे।
कर चूड ‘र कंकण, टीलिय कज्जळ, हेम झळाहळ हार सजे।
अवरेलिय ऊजळ, मात महाबळ ध्यान सुरां कुण आन धरे?
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।2

झकझोळ झकोळ रजे पग झांझर, सोळ सजे शणगार सरे।
मुख चोळ तंबोळ, भजां जग मालक, घुमर गोळ हिलोळ करे।
असुरां भड टोळ गै तोळ अभंगिय, हाक समोळ बेछाक हरे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।3

समर्यां नर वाण प्रमाण सुरत्तिय, थापण मेर मेराण थरं।
अरियांण हठाण बिराण उथापण, आपण लांण रधी अमरं।
बरदांण दियांण सुजांण महाबळ, पांव वडे दुनियांण पडे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।4

झक वीर हुंकार बजे सब जोगण भैरव लार टंकार भजै।
चहके धधकार अपार पिशाचरू रुद्र अहार डकार रजै।
अणवार मैया नरधार अणंकळ थापणहार उदार ठरे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।5

हदरेश व्रधेश बके छक हाकम, नेश क्रमेश करे नजरं।
समर्यां तण देश प्रचंड समेटणवेश नरेश परे वजरं।
अणभांत हमेश कृपा कर मो परडंम्मर वेश सुरेश डरे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।6

जग जाहर मात वधी जसजाहर, शायर रुप व्रता सदता।
वडगात्र अथाहर ऊजळ वायक, छत्र धरां सिर चाव सतां।
बिरदां कर जोड वदे कवि वीसळ, हाम हिए महाशोक हरे।
महाकाळिय तुं मछराळिय मोगल कांकण वाळिय ल्हेर करे।।7

।।कळस छंद छप्पय।।

मोगल सांची मात, ख्यात राखण नव खंडां।
मोगल सांची मात, दियण टेका व्रहमंडां।
मोगल सांची मात, त्रिहु भुवणंतर तारण।
मोगल सांची मात, विदगां मान वधारण।
आदिय शगत कायम अकळ, थर उजळ चळ थप्पिया।
कायमं ख्यात वीसळ कहै, मछराळी उजळ मया।।1

~~कवि वीसाभाई महडू (गाँव सामरखा, जिला खेडा)
(नरहरदान बाटी वीरसोडा द्वारा प्रेषित)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *