मनोज मिश्रण

नाम: मनोज मिश्रण पुत्र श्री रणजीत सिंह मिश्रण

स्थाई पता: गाँव-मोलकी, पोस्ट-अन्ता, जिला-बाराँ, राजस्थान

शिक्षा: कंप्यूटर साइंस में स्नातकोत्तर (M.Sc. in Computer Science)
[DRDO Sponsored program at DAVV, Indore]

तकनिकी कार्य अनुभव: 

  • कुल ३०+ वर्ष का तकनिकी कार्यानुभव। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक आईटी प्रोजेक्ट पूर्ण किये। ७ वर्ष अमेरिका एवं १ वर्ष दुबई में आईटी कंपनियों में उच्च पद संभाले।
  • २०१८ से वर्तमान में टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत।
  • २०१३ से २०१८ तक अमेरिकन कंपनी एओन कंसल्टिंग (Aon Consulting) में डायरेक्टर-आईटी के पद पर कार्य किया।
  • २००४ से २०१३ तक न्यूरो डिजिट इंडिया प्रा .लि. के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत।
  • १९९८ से २००४ तक अमेरिका में विभिन्न कम्पनियों में उच्च पदों पर कार्य किया।
  • १९९१ से २००४ तक भारत की बड़ी कंपनियों (L&T, Samtel, Chambal Fertilizers, TCS, Damco) में विभिन्न पदों पर रहकर आईटी के प्रोजेक्ट किये।

साहित्य क्षेत्र के प्रोजेक्ट: 

  • चारण साहित्य को आईटी के माध्यम से जनसुलभ बनाने की दिशा में वेबसाइट www.charans.org का निर्माण और लगातार इस वेबसाइट पर सामग्री उपलब्ध करते रहना। उक्त वेबसाइट आज चारण साहित्य कि एक मानक वेबसाईट के रूप मे सर्वमान्य है।
  • राजस्थानी महाभारत के रूप मे चर्चित स्वामी स्वरुपदास रचित महान काव्य ग्रन्थ “पांडव-यशेंदु-चन्द्रिका” को डिजिटाइज़ करके ऑनलाइन उपलब्ध करना और इसे किन्डल पर उपलब्ध करवाना।
  • डॉ.मोहन लाल जिज्ञासु के वृहत शोध ग्रन्थ “चारण साहित्य का इतिहास (भाग-1, भाग-2)” को डिजिटाइज़ करके ऑनलाइन उपलब्ध करवाना।
  • चारणों के गाँवों की जानकारी संगृहीत करके उसे नियोजित रूप में डिस्प्ले करना एवं राज्य के नक़्शे से शुरू होकर जिले एवं गाँव तक ढूँढने की व्यवस्था ऑनलाइन विकसित करना।
  • चारण समाज निर्देशिका (Community Directory) का पूरा तंत्र विकसित करके इसको ऑनलाइन करना।
  • चारण कैलेंडर को ऑनलाइन प्रदर्शित करके उसमे महान प्राचीन कवियों, साहित्यकारों से संबंधित प्रमुख तिथियों को प्रदर्शित करना।
  • चारणी छंद गायन, चिरजा गायन आदि पारंपरिक विधाओं को संरक्षित करने हेतु यू-ट्यूब चेनल विकसित करना।
  • डॉ.सीताराम लालस संकलित वृहत राजस्थानी शब्दकोष को डिजिटाइज़ करके ऑनलाइन करना तथा किसी भी राजस्थानी शब्द को शब्दकोष में ढूँढने की व्यवस्था विकसित करके इसको कंप्यूटर तथा मोबाइल पर उपलब्ध करवाना। इस कार्य के लिए जोधपुर महाराज गजसिंह जी द्वारा मायड़ भाषा सम्मान से पुरस्कृत।
  • राजस्थानी भाषा व्याकरण एवं इतिहास को डिजिटाइज़ करके ऑनलाइन उपलब्ध करना।
  • अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय के साथ मिलकर राजस्थानी के 61 प्राचीन ग्रंथों को डिजिटाइज़ करके ऑनलाइन उपलब्ध करने की वृहत परियोजना पर वर्तमान मे कार्य जारी है।

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