मनरंगथली मझ मात रमें – छंद : रोमकंद

!!दोहा!!
गुण लिखतां गुणपत थके, बरणत सुरसत व्यास!
मात तिहारै चरित को, दाखि सकै किम दास? १
नहीं छंद, रस भी नहीं, पास नहीं लय प्रास!
रास तऊ रचणौ चहें, डोकरड़ी तव दास!!२
छपन क्रोड चामुंड अर, जुड़ नवलख जग मात!
चौसठ जोगण संग ले, अंब रमें अवदात!! ३
संग चौरासी चारणी, भैरव ले सह भ्रात!
मात सात ह्वै मुदित मन, अंब रमे अवदात !! ४
भंजण शुंभ निशुंभ भड़, खल दल दंडण खास!
खड़ग, दंड, कोदंड ले, रमे चंडिका रास!!५

!!छंद – रोमकंद!!
शुभ-भाल विशाल! सुकुंकुम लाल सिंदूर कपाळ! निहाल करै!
जनु होठ प्रवाल, रु’चाल मराल, मृणाल डमाल कपाल धरै!
कच घुंघरियाळ, ज्यूॅं वासुकि व्याल, निहाळ छबि दिगपाळ नमें!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमें!
सबही मिल जोगण साथ रमै!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें||१||

श्रुति-लोलक कुंडल लोल कपोल सुगोल झळोहळ तेज झरे!
रसछोल़ उडै रमझोल़ पगां, धुनि ढोल त्रंबोल हबोल धुरै!!
सुर पंचम घोल किलोल करै घण बोलत कोकिल ज्यों बन मे!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमें!
सबही मिल जोगण साथ रमै!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें||२||

सुर धैवत पंचम नाद निषाद, रु’ बार हि बार गंधार सजै!!
सह बीन सितार, श्रीमंडल तार, बहार केदार मल्हार बजै!
झणणं झणकार करै घुंघरु पद पायल बाजत जेण समे!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमें!
सबही मिल जोगण साथ रमै!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें||३||

ऋषिकिन्नर चारण गान करै! तत थै तत थै तथ तान भरै,
सिध संत मुनि सब आन जुरै! सब देव खरै असमान परै!
रस राग बिहाग हुओ चहुधा, लखिकै जिहिको त्रय ताप शमें!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमे!
सबही मिल जोगण साथ रमें!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें!!४

नट, देश, बिहाग, अहीर, कल्याण बिलावल, जोग बिभास सुरं!
षड सोरठ भैरव मारु खमाज बसंत रू हंस ध्वनि मधुरं!
मुदरै सुर गान करै मुनि नारद शारद बीन बजै लय में!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमे!
सबही मिल जोगण साथ रमें!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें!!५!!

कर दंड कोदंड प्रचंड धरै सुर वैरिन के चतुरंग बलम्!!
भट भंजण शुंभ निशुंभ महाभड़, दंडण चंड रु मुंड दलम्!
शतखंड विखंडित पाप करै, चख नेत्र कटाक्ष तणे पलमें!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमे!
सबही मिल जोगण साथ रमें!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें!!६!!

धुनि घंट ठनंक ठनंक करै रण भेरि भनंक भनंक सुरै!
डम डैरव डाक डमंक डमंक घमंक घमंक बजै घुघरै!
ठणणं ठणणं पद चाप हुवै कर ताल बजावत तेण समै!!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमे!
सबही मिल जोगण साथ रमें!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें!!७!!

जगदंब मनोहर रास करै रंग लाल गुलाल अबीर उड़ै!
सुरताल पखावज बाज रहै मन में शुभ भाव न क्यूं उमड़ै?
“जयहो”” जयहो” “जयहो”” जयहो” पुनि “पात-नपो”जननी प्रणमें!
निशि पूनम चैत उजास नवेलख, रास मनोहर मात रमे!
सबही मिल जोगण साथ रमें!
मनरंगथली मझ मात रमें!
जिय आवड़ मां अवदात रमें!
रंग आवड़ मां जगमात रमें!!८!!

!!कलश छप्पय!!
तडित गर्भ शुचि अंग, गंग जिम मां अघहारी!
अद्भुत कथा प्रसंग, चंड मुंड दिये विदारी!!
भंजै शुंभ निशुंभ, अंब की महिमा न्यारी!!
आवड कृपा कदंब, बिरुद रो हूं बलिहारी!!
शुभ रास रच्यौ राजेश्वरी, गीत छंद मय गान दो!
बस चाहत नरपत बाल़ यूं, देवी आखर दान दो!!

!!दोहा!!
सुख संपति विद्या विपुल, अन धन दे आवास!
संकट मेटे शंकरी, रोज भणंतां रास!!

~~©नरपत आसिया “वैतालिक”

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