मरांला!!पण बेटी कीकर देवांला?

राजस्थान री आंटीली धरा माथै एक सूं एक बधर सूरमा अर साहसी मिनख जनमिया है। जदै तो कवियां कैयो है – पुरस पटाधर नीपजै, अइयो मुरधर देश! इण सिंह उत्पन्न करण वाल़ी धरा रै नर-नाहरां री अंजसजोग कथावां आज ई अमिट है अर पढियां कै सुणियां आपां नै गौरव री अनुभूति करावै। ऐड़ो ई एक किस्सो है रूण रै शासक सीहड़देव सांखला रो।

विक्रम रै चवदमे सईकै रै पूर्वार्द्ध में रूण माथै सांखलां रो राज। अठै रो शासक सीहड़देव महावीर अर स्वाभिमान रो साक्षात पूतलो। सीहड़देव रै मेहाजल़ दधवाड़िया पोल़पात। मेहाजल़ घणजोड़ो कवि, सामधर्मी अर चारणाचार रै गुणां सूं अभिमंडित मिनख।

सीहड़देव रै महारूपवंत कन्या। उणरै शील अर रूप गुणां री चरचा चौताल़ै चावी।

उण बगत दिल्ली माथै अलाऊदीन खिलजी रो शासन। खिलजी रजवट री रणबंकी धरा रै कई सूरमां नै धोखै अर घात सूं हराय धूंसतो थको रूण रै पासैकर निकल़ रैयो हो, उणी समय उणरै कानां में किणी चुगलखोर सांखली रै रूप अर गुणां री चरचा करी अर कैयो कै आपनै इण राजकुमारी साथै फेरा लेणा चाहीजै। खिलजी ई तेवड़ली कै सीहड़देव री कन्या नै परणीज र हरम री सौभा बधाई जावै।

उण रूण री कांकड़ में डेरा किया अर खबरची मेल र सीहड़देव नै कैवायो कै “कै तो थारी बेटी रो हाथ म्हारै हाथ में दियो जावै या मोत सूं मुकाबलो करण नै त्यार रैणो चाहीजै!”

ज्यूं ई सीहड़देव, खिलजी रो ओ संदेश सुणियो ज्यूं ई बो आपरै शरीर रै बटक्यां बोड़ण लागग्यो। तन रै झाल़ां उपड़गी। गात रा गाभा खावण लागग्या। उणनै ठाह हो कै खिलजी कन्नै सेना घणी अर खुद रै कन्नै मुट्ठीक आदमी!! बचकैक आदम्यां सूं अचाणचक खिलजी सूं मुकाबलो करण रो मतलब आपघात करण जैड़ो है! उण तुरंत आपरै पोल़पात मेहाजी दधवाड़िया नै बुलाया अर इण अणचींती आफत सूं ऊबरण री सलाह पूछी।

मेहाजी कैयो कै “इणमें पूछण री कांई बात है? धर जावतां, धरम पलटतां अर त्रिया माथै ताप आयां तो हर कोई मर पूरा देवै पछै आप तो रूण रा धणी हो!

धर जातां धर्म पलटता, त्रिया पड़ंतां ताव!
तीन दिहाड़ा मरण रा, कहा रंक कहा राव।।?

आपां ई केशरिया कर र रजपूती री आण कायम राखांला! आप जुद्ध री त्यारी करावो अर म्है दो दिन खिलजी री सेना रोकण री जुगत करूं।”

कवि मेहाजल़ रा भाव देवकरणजी ईंदोकली रै आखरां में-

इम सजजै आसेर, कर तोपां हर कांगरै।
फेरा हुवै न फेर, बाई रा बीजी बगत।।
दूजा धर दीजैह, असुभ रंग सह आंतरै।
केसरिया कीजैह, सजजै मांडो सांखला।।(सीहड़दे चरित)

मेहाजल़ दधवाड़िया सीधा खिलजी रै डेरे पूगिया अर कैवायो कै सीहड़देव रो पोलपात मेहो दधवाडियो पातसाह रै हाजर होणो चावै!

पातसाह ई पोलपात री महत्ता अर राजपूतां रै मन में चारणां री कद्र सूं परिचित हो। उण मेहाजल़ नै ससम्मान बुलायो अर आवण रो कारण पूछियो।

मेहाजल़ कैयो कै “आपरा समाचार सीहड़देव कन्नै पूगग्या पण ऊभघड़ी इतरी व्यवस्था होवै नीं सो चार दिन ब्याव री त्यारी करण वास्तै चाहीजै। जितै दो दिन आप म्हारै मेहमाण हो। कालै म्हारी बेटी रो ब्याव प्रसिद्ध चारण कवि हूंफाजी सांदू सूं होवैला। आप दो दिन म्हारै अठै रुकर बडजानी री रीत निभावो।”

खिलजी हूंफकरण सांदू री प्रज्ञा अर प्रतिभा नै सावजोग जाणतो। तो दूजै कानी मेहा री मेधा, वाकपटुता, सहजता अर आत्मविश्वास सूं प्रभावित होय दो दिन मेहमाण बणण री हां भरली तो दूजै कानी आ भोल़ावण दीनी कै सीहड़देव री बेटी सूं खिलजी री शादी करावण री जिम्मेदारी मेहाजल़ री है।

मेहाजल़ दो दिन खिलजी री इतरी आवभगत करी कै उण रीझर मेहाजल़ नै ‘कूरबै समंद’ रो विरद देय सम्मानित कियो।

दो दिनां में सीहड़देव ई आपरै भाईयां, सगै-संबंधियां नै भेल़ा कर लिया अर केसरिया कर र मरणो तेवड़ियो। ज्यूं ई अलाऊदीन नै ठाह लागो कै सांखला ब्याव री नीं मरण री त्यारी कर रैया है अर मेहाजल़ उणनै इणी खातर दो दिन धोखै में राखियो। उणरी रीस रो पार नीं रैयो। उणी बगत रूण माथै हमलो होयो। प्रभात री वेल़ा में राजपूतां मरण रांमत मांडी। हर-हर महादेव रै जोशिलै सुर अर चमकती तीखी तरवारां री धारां सूं एकर तो खिलजी रा पग डगमग ग्या पण जैड़ो कै घण जीतै अर जोधार हारै वाल़ी सही होई। आखर में सीहड़देव रै महलां में जौहर री झाल़ां धधक उठी। सीहड़देव पराक्रम बताय आपरी आण सारु वीरगति रो वरण कियो-

सिहड़दे लड़ियो खिलजी सूं,
अवनी पर राखण जस झंडी।
प्राणां रै बदल़ै पणधारी,
मरजाद सांखलै धर मंडी।।
(इणनै ईज कैता रजपूती! गिरधर दान रतनू)

वीरगति पावण सूं पैला सीहड़देव सांखलां नै भोल़ावण दी कै जे असली हो! तो दधवाड़ियां सूं मत बदल़जो अर जिको सांखलो आंसूं बदल़ेला बो असली सांखलो नीं होवैला-

सीहड़ राणै अक्खियो, आ धारा री धीज।
जो पलटै दधवाड़ियां, जो सांखलां न बीज!!

~~गिरधर दान रतनू “दासोड़ी”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *