माताजी रा आवाहण रा चाडाउ छंद

माताजी रा आवाहण रा चाडाउ छंद।

कविरे नांव गाँव रो ठा कोनी।

।छंद : नाराच।

चंडी सुभद्र सद्र अद्र आसणं चडी चडी।
भुजाक डाक डैरवां वडां वडां वडां वडी।
करे हुंकार वार वार दाणवां डकारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥1॥

नहीं सो माय बाप आप तैं ज आप ऊपणी।
सुसावित्री उमां रमां शचि अनूप रुपणी।
धिनो प्रचंड खंड मै अखंड जोत धारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥2॥

रचे धरात अंब रात सिन्धु सांत शंकरी।
नरां सुरां र नागनैं जचात जो जनंकरी।
सरांगि रात सर्व तुं उपात विश्व तारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥3॥

उडंत लाल लोवडी जगं मगं नगं जडी।
विशाळ भाल लाल बिन्दू मोतियां लडी लडी।
धजा फबंत लाल लाल धाबळी सु धारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥4॥

औपे डाढी सु ऊजऴी मुछाळ उजळी महा।
वणी सिंदूर बिन्दुली सुक्रंत ऊजळी सहा।
कनंक चूड कांचळी भली उरज्ज भारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥5॥

कनंक पत्र के विचित्र शीष छत्र छाबही।
अनंत अत्र डम्मरां सु चम्मरां ढुळावही।
सदा सुचंग अंग अंग भूषणां सॅवारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥6॥

तुंही नवे सु दुर्ग सप्त हिंगळाज तुज्झ ही।
सुरां समाज शेष नाग प्रज्ज राज पूजहिं।
सबै समृध्धि आप अंब सब्ब काज सारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥7॥

उथाप कान थान ही जिको जिभान आखियो।
रिधू सथान देय दाण, रिडमाल राखियो।
धिनो जवान जोरवान शूळ छत्र धारणी।
चितारतां सुपात मात चाढ आत चारणी॥8॥

2 comments

  • Digvijay singh

    Jai sri sa ,
    I literally felt the goosebumps when I was reading this chadau chand and I heartly appreciate the kaviraaj who wrote it . It’s my request to your team to make a chadau series as its very tough to find chadau chirja and chand
    Nowadays . It’s important to save all those chaadau chirja and chand which are not being saved digitally .

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *