मतीरै री राड़, रोकण रै जतन में जूझणियो कवि चांदो बारठ

ईंदोकली (नागौर) गांव आपरी साहित्यिक अर सांस्कृतिक चेतना रै पाण चावो रैयो है। इण गांव में एक सूं बधर एक कवि अर सूरमा होया जिणां चारणाचार नै मंडित कियो अर जगत में सुजस लियो। बारठ अखैजी रै वंशजां रै इण गांव में आंकधारी जनमिया जिणां आपरी बांक नै कायम राखी। रणांगण में जूझण री इण घराणै री आदू ओल़ रैयी है।सिहड़दे सांखलै रै साथै रूण री राड़ में अलाऊदीन रै खिलाफ वीरगति वरणियो सांढल, आऊवै रै धरणै में चारणां री कीरत निकलंक राखणिया बारठ अखोजी, च़ंद्रसैण रै साथै जूझणियो बारठ भल्लण अर वीर रतनसी जैड़ै सपूतां री कड़ी में ई एक अंजसजोग नाम है बारठ देदै रै सपूत बारठ चांदै रो।

उण दिनां नागौर माथै राव अमरसिंह अर बीकानेर माथै महाराजा कर्णसिंह रो राज। दोनूं ई वीर अर आपरी बात माथै मरण रो वरण करणिया राठौड़ हा। बीकानेर अर नागौर री कांकड़ चिपती सो नागौर रै एक खेत में मतीरै री बेल ऊगी अर नाल़ पसर बीकानेर रै खेत पूगी। उणरै मतीरो लागो। नागौर वाल़ां तोड़ण रा जतन करिया पण बीकानेर वाल़ां तोड़ण नी दियो। छेवट बात मरण-मारण तक पूगी।अमरसिंह उण दिनां दिल्ली हा अर बादशाह उणां नै नागौर सारू छुट्टी नीं दी। लड़ाई मंडी नागौर रा वीर ई मरण नै तैयार हा अर बीकानेर रा ई। सीमा माथै सेनावां भिड़ण सारू तैयार।

बारठ चांदोजी जिणां री ऊमर फगत १७-१८ वरस ही। बै बीकानेर रै गांव सीलवै रै आसिया चारणां रै परण्योड़ा हा अर मुकलावो लेयर पाछा आपरै गांव ईंदोकली जा रैया हा। उणां देखियो कै सींव माथै दोनां कानी री सेनावां मरण-मारण नै अड़ी खड़ी है। बै उतरिया अर लड़ाई रो कारण जाणियो। ठाह लागो कै एक स्याल़ियै रै खज खातर दोनूं कानी रा सिरदार मरण नै खड़ा है। अजोगती बात जाणर उणां दोनूं कानी रै मौजीज सिरदारां नै कैयो कै “आ लडाई नाकुछ मतीरै री है सो म्है चारण हूं अर आप राजपूत। ओ मतीरो म्हनै मांगियो दिरावो। आप दोनां री बात ई रैय ज्यावैली अर मिनखां रो गारत ई नीं होवैला।” बीकानेरियां तो हां भरली पण नागौर रा सिरदार बोलिया कै “बाजीसा मरण सूं डर लागै। मुकलावो करर पधारिया हो। मन सुख भोगण में है। आप नै ठाह है कै लड़ाई नीं ठंबी तो आपनै नागौर कानी सूं लड़णो पड़ सकै है जणै दावै ज्यूं लड़ाई रोकावण रा जतन कर रैया हो। आप कुशल़ै ईंदोकली पधारो आपनै लड़णो नीं पड़ै।” चांदैजी कैयो कै म्है मरण सूं नीं डरूं म्है तो बिनां बात आप सिरदार एक दूजै रो खून बहावण नै आखता पड़ रैया हो उणां नै रोकणा चावतो पण आ बात आपरै समझ में नी आवै तो म्है ई आपरै भेल़ू हूं पण म्है बिनां बात आपरो घाण होवतो नी देख सकूं सो आ कटारी आप सूं पैला नागौर रै पख में कंठां करूं।” इतरी कैय वीर चांदै राजपूतां रो गारत रोकण नै कटारी कंठां करर सुरगपथ रो राही बणियो।मतीरै सारू लड़ाई होई जिणमें दोनूं कानी रा केई वीर रणखेत रैया आखिर में जीत बीकानेर री होई पण नादानी अर अहम केई राठोड़ वीरां रा अजोगती बात सारू प्राण ले लिया। सनातनी रिस्तां री रक्षार्थ आपरा प्राण देवणियो वीर चांदो इतिहास में अमरता नै प्राप्त होयो-

डाढी डाढाल़ेह,चांदै चेराई नहीं।
बाढी बाढाल़ेह,दुजड़ां मूंडै देदवत।।

कवियां लिखियो है जद चांदो सुरग पूगो तो शंकर आपरी जटा सूं कलंकित चांद नै आगो करर निकलंक चांदै नै आपरै सीस सुशोभित कियो-

भांगै दल़ जैण सरीर भांगियो
माथो हर सिणगार मल़ै।
संकल़ंक चंद परो कर शंकर
निकल़ंक चंद चढाय नल़ै।।

चारण चरित्र री चंद्रिका नै चतुर्दिक चमकावणियो वीरवर चांदो आज ई अमर है।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

 

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