उडै सदा आकास जिम

( मेहाई सतसई – अनुक्रमणिका )

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गुरुवर गणपत औ गिरा, म्हारी थूं सब मां ज।
इणसूं वंदन आपनें, मेहाई महाराज।।१
एकरदन अर गजबदन, ह्रदय सदन मँह राज।
आखर लिखणा अंब रा, मेहाई महराज।।२
क्यूं गणपत वंदन करूं, जिणरी पण थूं मां ज।
गौरी रुप गिरिजा स्वयं, मेहाई महराज।।३
मूषक म्हालै गणपति, घण मूषक मढ मां ज।
गौरी मां गिरिजा नमूं, मेहाई महराज।।४
गुरू ज्ञान दाता नमन, उकती समपौ आज।
रचना दोहामय रचूं, मेहाई महराज।।५
बण सुरसत रसना बसे, उकती समपण आ ज।
शारद मय वंदन सदा, मेहाई महराज।।६
नवरस नित नित अरपजे, कवित कथण तव काज।
सुरसत रूपी तूं स्वयं, मेहाई महराज।।७
शुभ दोहामय सतसई, रचण चहूं रिधु राज।
पारपाड देशाणपत, मेहाई महराज।।८
तूं हिज समदर तारणी, झगडूशा री जाज।
त्यूंही भव जळ तारजे, मेहाई महराज।।९
किण आगळ माता कथूं, दिल री सगळी दाझ।
साद सांभळे संकरी, मेहाई महराज।।१०
सदां बुलायां साबदी, आवै सुणै अवाज।
लेस देर लायां बिनां, मेहाई महराज।।११
परसन रह परमेसरी, नँह वेजै नाराज।
बाळक अवगुण बगसणी, मेहाई महराज।।१२
ध्यान आप रो धारतां, वित, धन देवै वाज।
सरस राखणी स्वास्थय नें, मेहाई महराज।।१३
उडै सदा आकाश जिम, पंछी बळ परवाज।
म्हारै इम थूं मावडी, मेहाई महराज।।१४
दुखिया री देवी सदा, निहचै दीन- निवाज।।
डाढाळी थूं डोकरी, मेहाई महराज।।१५
राजी हुय राजा करै, रूठ्यां छीने राज।
जंगळ धर जोगण जबर, मेहाई महराज।।१६
रात दिनां प्होरै रहै, करे भगत रा काज।
मूंछाळी ममतामयी, मेहाई महराज।।१७
अधम दुष्ट खल आसुरी, लोपी म्है कुळ लाज।
तो पण मां थूं तारजे, मेहाई महराज।।१८
आई आगै आविया, एकर सुणै अवाज।
आता रहिजो थें अवस, मेहाई महराज।।१९
आखर नरपत आखतो, रच मन रव सुर साज।
मात चूक सब मेटजे, मेहाई महराज।।२०
जोत जगामग जळहळे, जय जय करे समाज।
कविजन कीरत तौ कथे, मेहाई महराज।।२१
ओरण मानव उमडिया, फेरी देवण काज।
आयी चवदस आप री, मेहाई महराज।।२२
देशाणे रे द्रंगडै, बजै पखावज झांझ।
आरती उतरे आप री, मेहाई महराज।।२३
थारा वार अचूक मां, थूं वड तीरंदाज।
खल़ दळ खंडण चंडिका, मेहाई महराज।।२४
काज कवेसर रा करे, जबर झपाटे बाज।
लेस ढील लायां बिनां, मेहाई महराज।।२५
गहराणां वादळ घणा, जबर फसी है जाज।
समदर पार उतारजो, मेहाई महराज।।२६
गडहड बादळ गडगडै, किण नें करूं अवाज।
म्हारै मावड मोकळी, मेहाई महराज।।२७
आवड अवतारी थनें, मावड कथे समाज।
तूं लज राखे त्रंबका, मेहाई महराज।।२८
लोवड हंदी ओट ले, मां ममताळी आज।
म्हूं बाळक थूं मावडी, मेहाई महराज।।२९
सेखा नें मुलतान सूं, पीठ-चील-परवाज।
बाई लाय बचावियो, मेहाई महराज।।३०
मढ आगे गावै मधुर, जण जण एक अवाज।
“धिन धणियाणी धावडी” मेहाई महराज।।३१
कळजुग आयो कारमो, सुंदर करो सुराज।
भारत बगसो भव्यता, मेहाई महराज।।३२
मढ देशाणा माय नें, तपे तमीणो राज।
सगती नवलख संग में, मेहाई महराज।।३३
जद जद चारण जात पर, गरजे अरियां गाज।
लुका लोवडी ले बचा, मेहाई महराज।।३४
व्याधि रोग तन दूर वे, होवै उमर दराज।
सदा मातनें समरतां, मेहाई महराज।।३५
जोगण धर जंगळ तणी, सब नव लख सिरताज।
देशाणां री डोकरी, मेहाई महराज।।३६
ना मांगूं जश मान नें, नही कुटुम्ब समाज।
चहूं चरण री चाकरी, मेहाई महराज।।३७
काळ झपट्टा जद करे, तीतर पर जिम बाज।
विकट घडी वाहर बणै, मेहाई महराज।।३८
बाळक हूं बड बोलणो, लेस नहीं कुळ लाज।
ममता पण मत मेलजो, मेहाई महराज।।३९
कान्ह हण्यो बण केहरि, रिडमल समपण राज।
अपरम लीला आप री, मेहाई महराज।।४०
मुघल कामरां मरुधरां, आयो दळ बळ साज।
जदे बचायो जेतसी, मेहाई महराज।।४१
ठाकर नें चाकर करे, चाकर रे सिर ताज।
अकळ कळा जग आप री, मेहाई महराज।।४२
समदर जळ रा सारसां, जिम उड फेर जहाज।
म्हारै इक इम आसरो, मेहाई महराज।।४३
लोवडियाळी भाळ ले, मत तरछोडे आज।
म्हारी मीठी मावडी, मेहाई महराज।।४४
निहचै नेह निहाळणी, स्नेह -सुधा सरिता ज।
धाबळवाळी धा वडी, मेहाई महराज।।४५
जोधाणा बीकाण री, रखी नींव जद राज।
उण दिन कमधज थरपिया, मेहाई महराज।।४६
तूं थापे तूं उत्थपै, आपै सब सुख साज।
विध विध लीलामय वदी, मेहाई महराज।।४७
गुण थारा किम गावणां, म्हारो मंद अवाज।
अंतस री अरजी सुणे, मेहाई महराज।।४८
चील बण’र चहुदिस फिरै, रखे रुखाळां राज।
देशाणा री डोकरी, मेहाई महराज।।४९
धर बीकाणां री धणी, तथा जोधपुर ताज।
कमधज तो सेवा करे, मेहाई महराज।।५०
शंकर रे जिम शंकरी, करे भगत रा काज।
देस-दीप देशाण मढ, मेहाई महराज।।५१
देपासर है देवसुरि, अवगाहण ने आज।
देशणोक री इक-जटी, मेहाई महराज।।५२
चरण तणी दो चाकरी, अशरण शरणी आज।
म्है मांगूं वरदान औ, मेहाई महराज।।५३
केवट बण खेवन करे, जग में म्हारी जाज।
वडी विदग री वाहरू, मेहाई महराज।।५४
जंगळ धर जोगण खरी, मंगळ करण समाज।
टाळ अमंगळ दास रा, मेहाई महराज।।५५
जबर बबर जामण वळे, दळे दुष्ट रा राज।
टळे विघन थारै थकी, मेहाई महराज।।५६
काटण कष्ट करूर नें, सजियो दळ बळ साज।
मैखासुर मारण बढी, मेहाई महराज।।५७
कांई कीरत तव कथूं, राज सरीखा राज।
म्है न पिछाण्या मावडी, मेहाई महराज।।५८
मंगळ जांगळ में कियो, रिडमल नें दे राज।
कीरत थारी किम कथूं, मेहाई महराज?।।५९
कान्हौ हथ्थळ हेक गह, रोळ्यौ बण बनराज।
म्हारा इम अरि मारजे, मेहाई महराज।।६०
दख्खण कर नरमुंड खळ, सिंह सवारी साज।
वाम करां तरशूळ वळ, मेहाई महराज।।६१
देशणोक री डोकरी, बसजे ह्रदय बिराज।
इतरो दूर न आ सकूं, मेहाई महराज।।६२
देशणोक घण दूर है, देवी पंथ दराज।
सोच मात सुपने मिळै, मेहाई महराज।।६३
सेवा आवड री सदा, सुबह करे अर सांझ।
मढ देशाणा मांय ने, मेहाई महराज।।६४
तुझ्झ सरीखी तूं ज है, अलग आप अंदाज।
उचर सकूं नह अवर अब, मेहाई महराज।।६५
जनम, मरण अर जीवणो, अंत मध्य आगाज।
नाम लियां निहचै सफल, मेहाई महराज।।६६
तूं पाळक तिहुलोक री, अखिल जगत अधिराज।
डग मग पग री डोकरी, मेहाई महराज।।६७
मढ देशाणा मांय नें, बाई सदा बिराज।
माळा आवड री जपै, मेहाई महराज।।६८
लीध हाथ जद लाकडी, गया दैत दळ भाज।
थग थग पग थिर पण खडी, मेहाई महराज।।६९
दुख निज दाबै राखिया, मन री है मन मांझ।
सुणै अरज सांची सगत, मेहाई महराज।।७०
जाती चारण नें जबर, निहचै तौ पर नाज।
सब सगती सिरताज तूं, मेहाई महराज।।७१
महिमा थारी मावडी, कथ सकियो कव आज।
किरपा औ म्हौ पर करी, मेहाई महराज।।७२
बंदीजन थारा बहुत, इण धरती पर आज।
गिणती म्हारी कुण गिणे, मेहाई महराज।।७३
निहचै तौ वड नाम री, चढी खुमारी आज।
अवर नशा ओछा लगे, मेहाई महराज।।७४
जिण जन मन मँह जाणियो, नाम नशा रो राज।
उणनें थें अपनाविया, मेहाई महराज।।७५
नशो नाश रो मूळ है, आखै जन जन आज।
नाम नशो अदभूत पण, मेहाई महराज।।७६
कइयक परवाडा किया, कविता मैं कविराज।
म्है तुकबंदी मांड दी, मेहाई महराज।।७७
देशाणा रे द्रंगडै, बण सर विटप लताज।
कण कण किनियाणी बसै, मेहाई महराज।।७८
आय’र अंतस ओरडे, बस मां ह्रदय बिराज।
तद जनमारौ व्है सफळ, मेहाई महराज।।७९
लाखण लायी लाडलो, जबडां सूं जमराज।
अजब प्रवाडा आप रा, मेहाई महराज।।८०
लोचन लाल लखावणी, सबळ देवियां साज।
गरब असुर रा गंजणी, मेहाई महराज।।८१
आई आयी अवनि पर, जाई कुळ किनिया ज।
ब्याही बाई देप सों, मेहाई महराज।।८२
आवड इळ जिम अवतरी, हुय देवी हिंगळाज।
इम आवड रो रूप है, मेहाई महराज।।८३
सात मात लघु बंधु री, सेवा करत सदाज।
देखी म्है देशाण मढ, मेहाई महराज।।८४
जिम हरि आय जिवाडियौ, गाढै जळ गजराज।
इम कलि मकर छुडावणी, मेहाई महराज।।८५
मात सात मंडळ तथा, सथ नव लख सज साज।
रास जमै जबरी रमै, मेहाई महराज।।८६
क्रोड छपन चामुँड नव, लख सँग चौसठ साज।
रमै अखाडे रास अज, मेहाई महराज।।८७
तावड मँह छावड करे, मावड धर ममता ज।
वड आवड रो व्याप है, मेहाई महराज।।८८
लोवड मांय लुकावियो, रवि ऊगंता राज।
वा आवड वड आप खुद, मेहाई महराज।।८९
वड आवड मावड तणा, थान घणां थन-राज।
उणरो समुचय एक है, मेहाई महराज।।९०
डाढाळी थूं डोकरी, बाढाळी जद बाज।
गाढाळी गढवी बचा, मेहाई महराज।।९१
डावड नरपत आप रो, मावड कर ममता ज।
वड आवड धावड वपु, मेहाई महराज।।९२
राजी व्है ज्यूं राखजै, नँह व्हैजै नाराज।
सदा अरज औ शंकरी, मेहाई महराज।।९३
चरण कमळ चारण चहै, रखौ छांह में राज।
नरपत आसळ री अरज, मेहाई महराज।।९४
खोळै बाळ खिलावजो, दया धार दिल मांझ।
म्है नटखट शिशु मात तव, मेहाई महराज।।९५
राजा तूं ब्रहमांड री, अधिपतियां अधिराज।
सचर अचर संचालिनी, मेहाई महराज।।९६

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