म्हांरै जीवतां डंड भरावै! उणां री भुजां में गाढ चाहीजै!!

भारत रै इतिहास अर विशेषकर राजस्थान रै इतियास में चहुवांणां रो नाम ऊजल़ो। गोगदेव, अचल़ेश्वर पृथ्वीराज, कान्हड़देव, वीरमदेव, मालदेव बणवीर, हम्मीर, कान्हो डूंगरोत, सांवल़दास-करमसी जैड़ा अनेक सपूत चावा रैया है। किणी कवि कैयो है-

गोकल़ीनाथ जग जापिये, कान्हड़दे मालम करै।
ए राव सुखत्री ऊपना, चवां वंश चहुवांण रै।।

चहुवांणां री एक शाखा ‘वागड़िया चहुवांण’। इण शाखा में मुंधपाल मोटो मिनख होयो। इणी मुंधपाल री वंश परंपरा में बालो अर बालै रै डूंगरसी होयो। डूंगरसी, राणै सांगै रै मोटै सामंतां में शुमार। जिणरै बदनोर पटै। डूंगरसी कई जुद्धां में आपरी वीरता बताई। जद राणै अहमदाबाद रै शासक मुदाफर माथै हमलो कियो उण बगत ई डूंगरसी आपरै पूरै कुंटबी वीरां साथै हरावल़ में हो। अहमदाबाद रै गढ री जंगी पोल़ जद किणीगत नीं खुली उण बगत डूंगरसी रै बेटे कान्है पोल़ री शूल़ां रै आडै ऊभर हाथियां री सूंड सूं बींधीज पोल़ पटकाई। इणी डूंगरसी रै एक बेटे लालसी रो बेटो सांवल़दास अर दूजै बेटै सूरसी रो भाण अर भाण रो करमसी होयो।

आ बात सांवल़दास-करमसी री वीरता अर अदम्य साहस री है।

उण दिनां डूंगरपुर माथै रावल़ आसकरण(1603-1637) राज करै। ऐ आसकरण रा मोटा सामंत। उदयपुर माथै राणा उदयसिंह(1597-1628) रो राज। उदयसिंह आपरा आदमी मेल आसकरण नै धमकायो अर डंड सरूप घोड़ा मांगिया। आसकरण री उदयसिंह सूं टक्कर लेवण री आसंग नीं पड़ी उण डरतै डंड भरण री हां भरली अर घोड़ा पुगावण री तैयारी करण लागो। आ बात जद वागड़ियै वीरां सांवल़दास अर करमसी नै ठाह पड़ी तो बै अजेज आपरै ठिकाणै सूं डूंगरपुर आया। रावल़ आसकरण अर उणरै बीजै सिरदारां नै फटकारिया। सांवल़दास कैयो “थे डंड री हां भरणिया कुण हो ? म्हे वागड़ रा भोमिया हां अर इण भोम री आबरू राखणो म्हांरो कर्त्तव्य है। म्हे मर थोड़़ा ग्या जिको उदयपुर वागड़ सूं अणखाधी रो डंड भरावै। कोई डंड नीं। म्हे मरांला अर मारांला पण डंड नीं दां ला “

खागां वागां खिर पड़ै, परतन छाडै पग्ग।
रंग अणी रा रावतां, टणकां आडी टग्ग।।

कविवर मेहा वीठू आपरी कालजयी कृति -“करमसी-सांवल़दास चहुंवांण रा कवित्त ” में लिखै-

परधांन मेल्हि चित्रोड़पति,
डूंगरपुरांस दक्खियो।
मांगिया उदैसिंघ मछरियै,
दियो डंड घोड़ां दियो।।
……

मेवाड़ै मांगिया,
पवंग कनला डूंगरपुर।
सुणै बात चहुंव़ांण,
रोसि हंसिया राजेसर।
म्हे वागड़ भोमिया,
भोमि वागड़ म्हां पूठी।
ताइ भविता नह टल़ै,
परमि जाइ लेखै परठी।
इखेवि अंत डर अंतरै,
सिरै डंड जाइसां सहै।
जीवियो अजीवित ताहि जग,
करमसीह सांवल़ कहै।।

आसकरण ई इण वीरां रै साहस अर वीरता सूं परिचित हो। उण डंड भरण सूं मना कर दियो। आ बात उदयसिंह रै प्रधानां राणै नैं मांडर बताई-

कारिमां पिंड जतनह किसा,
कथन मुक्खि एरस कहै।
ऊद रा प्रधानां आगल़ी,
सांमल़ डंड न सहै।।
~मेहा वीठू

आ बात सुण र उदयसिंह आपरी फौज डूंगरपुर माथै मेली। इण वीरां मेवाड़ी सेना नै धूड़ चटा दीनी। वीरता अर अडरता सूं मुकाबलो कियो अर लड़तां थकां वीरगति वरी-

मरण करै मछरीक,
विढै चढै विम्माणै।
पल़चारी पल़ भखै,
रुधर पूरै रणढाणै।
सात वीस रावत्त,
सांमि सरसां समरट्टां।
सतियां झूल़ सहेत,
वरां सरिसै कुल़वट्टां।
मेवाड़ दल़ सो लोह मिल़ि,
हेकव के जए तांम होइ।
करमसी अने सोमल़ि कियो,
करै न इम अवसांण कोइ।।
~मेहा वीठू

आ बात किणी ऐतिहासिक ग्रंथां में तो नीं मिलै पण कविवर मेहा वीठू री इण कृति में आए इण दाखलै री साखी वनेश्वर महादेव रै कनै विष्णु मंदिर री आषाढादि वि.सं.1617 (चैत्रादि 1618 शाके 1483 जेठ सुदि 3) री महारावल़ आसकरण रै समै री प्रशस्ति है-

पृथ्वीराजात्मजो योशावाशकर्णः श्रियान्वितः
यस्य किंकर वर्गेण मेदपाट पतिर्जित।।
अर्थात पृथ्वीराज रै पुत्र सम्पतिशाली आसकरण रै सेवकां मेवाड़ रै राजा नै जीतियो।
वागड़ियै चहुवांण वीरां आपरी बात अर जनमभोम रो गौरव अखी राखियो।

~~गिरधर दान रतनू दासोड़ी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *