म्हूं सबद-ब्रहम रो चेलो

ShabdBrahm

म्हूं सबद -ब्रह्म रो चेलो!
सबद रीझतौ, सबद खीझतौ, मिल्यौ गुरू अलबेलो!

सबद नाथ रे कुम कुम चोखा, धरूं भाव रस भरिया,
सबद अमीणी राधा मीरां, सबद सखी साँवरिया,
नवधा भगति करूं आप री, सुणो सबदजी हेलो!
म्हूं सबद ब्रह्म रो चेलो!

सबद गुरुजी भाव पियाला, करै हेत जद पाया,
अवर नशा सब ओछा लागा, अणहद आणंद आया,
चढी खुमारी, तन मन भारी, पडतां म्हानै झेलो!
म्हूं सबद -ब्रह्म रो चेलो!

सबद गुरुजी भेद बताया, पकडो लय पगदंडी,
मिल़सी थांने उण दिस मंदिर, जठै फरूकै झंडी,
झालर झणके, बजै नगारां, वठै वसै अलबेलो!
म्हूं सबद ब्रह्म रो चेलो!

सोरठ, दीपक, काफी, तोडी, यमन भैरवी भावे!
सबद गुरू अनहद आलापै, सबद अनलहक गावे!
आज धन्य “नरपत” ने कीधौ, बरसावै रस रेलो!
म्हूं सबद ब्रह्म रो चेलो!

~~©वैतालिक

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