मोगल वंदना

!!छंद-नाराच (पंच चामर)!!

प्रणम्य !श्री गुरूं !पदाम्बुजं सुचित्त लाइके!
उमा-महेश पुत्र श्री गणेश को मनाइके!
स्मरामि धात्रि काव्य दात्रि श्वेतवस्त्र धारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! १

लसंत लाल लोबड़ी! जवाहरात सूं जड़ी!
सुबिंदुली ललाम भाल सिंदुरं, गळे लडी!
सुगौर गात! कालरात! मां नभोविहारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! २

अलंकृतं सुमौक्तिकं हिरण्य हार सुंदरं!
भुजा फबंत चूड़ बाजूबंध कंकणं वरं!
अनंत! तेजवंत ! सिंह शेष पे सवारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!३

अथाह! आभ! वारिवाह! वाह मां विराजती!
सुकेश गूंथ आप के दिगांगना सॅंवारती!
समुद्र-दर्पणं विलोक के सदा शृंगारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!!४

अनूप रूप! भोम भूप! रश्मि रोमकूपिणी!
कपाल आभ! चंद्र सूर्य नेत्र! विश्व रूपिणी!
ध्वनि प्रचंड मेघ मंड गाज ज्यूं हुॅंकारणी!
श्री मोगलं शिरोमणीं सुचिंतयामि चारणी!! ५

कराल काल! क्रोध-ज्वाल ! सिंह सी दहाड़नी !
उछाल दैत्य आभ लों, पहाड़ पे पछाड़नी!
मदांध दुष्ट दानवादि वंश की विदारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!! ६

सदा सहाय!रंक राय! दुष्ट दैत्य डारती!
कराल काल के कपाल पे थपाट मारती!
न लेश देर लावणी पुकार पे पधारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!! ७

डमा! डमा! डमाल डाक घूघरा घमा घमा!
ढमा ढमा बजंत ढोल छम्म झांझरां छमा!
खमा! खमा! नमामि मात गर्व दैत्य गारणी!!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!!८

स्वभक्त पाल! हाथ व्याल! नेत्र ज्वाल मालिनी!
भुजा विशाल! भव्य भाल! अंबिका ! कृपालिनी!
रमंत रास खेल खास शत्रवां सॅंहारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!! ९

त्रिशूलशूलहस्तअंब चंड मुंड दंडणी!
अखंड-ज्योति! ईश्वरी!घनान्धकार खंडनी!
दिगंत-देह! व्योम गेह! नेह सों निहारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!१०

महातपा! सती! शिवा! त्वमेव ब्रह्मवादिनी!
महाबला! महोदरी!नमोअघोरनादिनी!
महीषमानमर्दिनी! निशुंभ शुंभ मारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!! ११

कृषोदरी! त्वमेव भद्रकलिका! शवासनी!
श्मशान वासिनी!सुतीक्ष्णदंष्ट्र! अट्टहासिनी!
कपर्दिनी! करालजिह्व-दानवं-डकारणी!
श्रीमोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! १२

त्वमेव सिंधुजा रमा! धनं सुवर्णधान्यदा!
जया! श्री!मंगला! वरा! प्रदायिनी सुसंपदा!
सुधा! स्वधा! वसुंधरा! दरिद्रता प्रजारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! १३

तुही सुधार बिन्दुसार हेम हार भारती!
सितार तार छेड़ ॐकार मां उचारती!
सरोजपाणि शारदे नमो अज्ञान टारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी!सुचिंतयामि चारणी!!१४

उरं उजास दे प्रकाश, त्रास मेट शंकरी!
क्षयंकरी! जयंकरी! कृपाकरी! शुभंकरी!
कलामंजीररंजनी! यतिं! त्रिलोक तारणी!
श्री मोगलंशिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! १५

उमा! रमा!गिरा! तुही! सुमंदमंदहासिनी
तटे समुद्र वासिनी! स्वयं प्रभा प्रकाशिनी!
उपाधि आधि व्याधि की नमो नमो निवारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!! १६

नगे उमा! जले रमा! रणे महाकपालिनी!
सुहस्त शेष हेम खाग डाकिनी! डमालिनी!
स्वभक्त रक्षिणी शिवा ! प्रणाम कष्ट हारिणी!!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!!१७

फॅंसी तरी भवाब्धि में भवा सुभाव रीझिए!
पडंत पाॅंव, रंक राव दास पे पसीजिए!
डुबंत नाव! अंब आव! पार तू उतारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी सुचिंतयामि चारणी!! १८

समृद्धि रिद्धि सिद्धि! वृद्धि वंश की प्रदायिनी!
प्रसिद्धि औ विशुद्ध बुद्धि युद्ध जीत दायिनी!
सुभुक्ति मुक्ति दायिका स्वभक्त काज सारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! १९

बजंत घंट शंख नित्य झालरं गुॅंजारती!
सुछंद स्तोत्र अग्निहोत्र होत ज्योत आरती!
सुकाव्य श्राव्य रीझिए सनेह सौख्य कारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!!२०

नवेलखं-सुशक्ति-माळ !तूं सुमेरू जोगणी!!
खमा घणी! वड़ी धणी! सुकीरती “नपे” भणी!
अखंड भक्ति दीजिए !उदो उदो उचारणी!
श्री मोगलं शिरोमणी! सुचिंतयामि चारणी!! २१

~~©नरपत आसिया “वैतालिक”

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