नैण

नैणा री मद धार वै, तौ प्याला बेकार।
नशौ प्रेम रो सब सिरै, सजण परूसण-हार।।1

नैणा री मनुहार नें, सैण करौ स्वीकार।
जैण नसो होसी जबर, रैण तणै अंधार।।2

नैणा घी री धार कर, पिया! लापसी-प्यार।
राज परोसूं आप कज, जिमौ  बारंबार।।3

नैण-कटारी साथ ले, तन जोबन-तोखार।
चढ जुध खेलूं पिव सूं, रात तणै अंधार।।4

नैण सैण अर रैण री, मिळी त्रिवेणी धार।
चलै कुंभ री त्यारियां, तन पयाग  रे द्वार।।5

प्रीतम संत  पधारिया, तन-घर दियौ बुहार।
आसन हिय रो आपियौ, हैत करै अणपार।।6

नैण  कोटडी रा सखी, पलकां तणां किवाड।
बंद करुं, तौ बालमौ, सुपनै आवै चाढ।।7

नैण काजळी कामणी, रैण काजळी जोर।
सैण काजळी कान जिम, हुं काळजिया-कोर।।8

~~नरपत आसिया “वैतालिक”

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