नमण धरा नागौर

नमण धरा नागौर, और कुण तो सूं आगै।
संत भगत सिरमौर, तोर जस जोती जागै।
तूँ मोटी महमाय, उदर मीरां उपजावै।
गुण गोविंद रा गाय, दाय नह दूजो आवै।
जहं सूरवीर पिरथी सिरै, (अरु) देव-देवियां अवतरै।
गजराज आज घण गरब सूं, (थनै) क्रोड बार वन्दन करै।। 01।।

प्रबळ तिहारा पूत, जूत जुल्मयां सिर जड़तां।
सिरक्या ना इक सूत, माण हित माथा झड़तां।
इक इक नाम अमाम, काम ज्यांरा कुण कूंतै।
तीखै तोर तमाम, शत्रु सिर खागां सूँतै।
जठ सुभट वीर तेजै जिस्या, डंक भरत वासग डरै।
प्रण हेत प्राण समपण पखै, कहो समोवड़ कुण करै।। 02।।

गजब झोरड़ो ग्राम, जठै हरिराम विराजै।
चतर दास रो नाम, भणत सुण लकवो भाजै।
जीव दया री जोत, जकी दीपदिपती जागै।
विश्व मांय विख्यात, सुजस जम्भेसर सागै।
भल पंथ निरंजण प्रगट भो, अथ डिडवाणो आदरै।
आचार्यप्रवर तुलसी इसो, तेरह पँथ में संत सिरै।। 03।।

अमर जिसो उमराव, किसो किण भोम उपायो।
खळ दिखतां खट काढ़, खेंच खांडो खळकायो।
मुगलां रो कर मोद, सलावत कुबध कमाई।
अमर सिंह सूं अड्यो, करमगति आडी आई।
खळ मूंह गाळ काढ़ण खुल्यो, (इत) कटक कटारो काढियो।
गजराज गाळ चिपगी गळै, (जद) बकरै ज्यूं सिर बाढियो।। 04।।

जसधारी जयमल्ल, मल्ल नामी मरदानो।
खळां दळां खलबल्ल, काळ साक्षात कहानो।
अकबर कहियो आय, लाय मत मोय लगाओ।
देऊं रियासत दोय, जोय पाछा मुड़ ज्याओ।
नागौर मेड़तो नह लियो, कियो न लालच भोम को।
गजराज फर्ज हित कट गयो, कर जसनामो कौम को।।05।।

~~डॉ. गजादान चारण “शक्तिसुत” नाथूसर

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