नर ग्या चढा वँश रै नीर

गीत वेलियो
पत री बह राह अपत नै परहर, सत री कह समझनै सार।
कूड़ी कथ त्याग भजै किरता, सो जन लेवै जनम सुधार।।१

हर रो नाम राख हिरदै में, गलवै मधुर उचारै गीत।
भल वै बज्या सांप्रत भाई, जो वै गया जमारो जीत।।२

गाफल नींद सोया नह गुणियण, रसना रटियो हरदम राम।
जस वां लियो जगत में जोवो, निरभै छोड गया निज नाम।।३

सुखिया हुवै दुजां रै सुख में, दुखिया हुवै दुजां दुख देख।
परहित काम महा सुख पामै, नर धिन बजिया घरती नेक।।४

एको ईस तणा अनुरागी, सुख हद त्यागी रहे सधीर।
सुणजो गीध कहे साचोड़ी, नर ग्या चढा वँश रै नीर।।५

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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