न्याय पख तोड़दे बंधण सह नारायण

न्याय पख तोड़दे बंधण सह नारायण,
सरायण जगत रा काज सारा।
परायण-धरम रा सको जग पाल़वा,
करायण जनमतां मुगत कारा।।1
वंश रा दीप तूं कीरती बधावण,
अंश वसुदेव रा जगत ओटो।
तोड़िया जनेतां संस सह तड़ाकै,
खाल़ियो कंस सो दैत खोटो।।2
जोरवर आमजन भीर हद जूपियो,
गुमरधर पुरंदर गरब गारै।
वसुंधर उबारण वनां रा विहारी,
धुरंधर गोरधन चिटू धारै।।3
संखधर प्राण तैं पूतना सोखिया,
दोखियां तणै दिल बीह दीनो।
तोड़वा राकसां शस्त्र सिर तोखिया,
भुयण में रोकिया क्रोध भीनो।।4
रुकमणी चाहना पूरणो रीझनै,
चूरणो रुकम रो गाढ चोड़ै।
झूरणो कितांयक खल़ां दल़ झफीड़ां,
तामस्यां बूरणो अहम तोड़ै।।5
ऊठियो महाभड़ अपरबल़ आपरै,
रूठियो सीस शिशपाल़ रूड़ो।
छूटियो सुदरसण करां सूं छत्रधर,
कूटियो मारियो दूठ कूड़ो।।6
करूणधर जगत में तिहारी कीरती,
जबर-नर तुलै ना दुवां जोड़ै।
आपरां तणी ले खबर तूं अहरनिस,
तदै ई विपर रो दल़द तोड़ै।।7
कांम की बडो नै लघु की कांम रो?
सांम तैं संदेशो दियो सारै,
गाय नै चरावण अभयबल गांम रो,
धनंजय सारथी नांम धारै।।8
पूरिया पंचाल़ी पंगरण परगल़ा,
नाथ नै आरतं करण नारी।
महिल़ा अंतस में भरण हद मरटपण,
साख हद जेण री धरण सारी।।9
प्रेम रो पूजारी विदुर घर परठियो,
राजघर माण बिन नको रीझ्यो।
कंदली छूंतका पाय हर कोड सूं,
भीर धर दास रै नेह भीज्यो।।10
तोड़दी भीखम री प्रतग्या तड़ाकै,
गाढबल़ लड़ाकै आंट घालै।
भड़ाकै क्रोध रै बीहिया भटारक,
झड़ाकै पांण बल चकर झालै।।11
दास कव गीधियो वीणती दाखवै,
राखवै शरम हद होय राजी।
मरम री समझनै बात सह माधवा,
पाखैकर मूझ सूं टाल़ पाजी।।12
~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”