पदमण सुजस प्रकास

पापी के खपिया प्रिथी, विटळा केक विनास।
जस धिन दूणो जगमगै, पदमण तणो प्रकास।।

जिण झाळां री झाट सूं, खपियो खिलजी खास।
प्रिथमी सारी पसरियो, पदमण सुजस प्रकास।।

सत उर में साहस सधर, जबर वर्यो जसवास।
सांम नांम स्वाभिमान रो, पदमण तणो प्रकास।।

आय अलाऊदीन ऊ, निसचै हुवो निरास।
वर अगनी कीधो वसू, पदमण सुजस प्रकास।।

जणणी घरणी जिकणी, घणा करै घरवास।
उण रै दाह उपावणो, पदमण सुजस प्रकास।।

काठ चढै ली कीरती, रम घम झाळां रास।
दिन- दिन दूणो दीपतो, पदमण सुजस प्रकास।।

ससिहर साखा सांपरत, भरै साख भल भास।
दाह दीनी उर दोयणां, पदमण तणै प्रकास।।

लंगर पहरण लाजरा, हिरदै बळण हुलास।
करगी ऊजळ कोम नै, पदमण गात प्रकास।।

चमकै अजै चित्तौड़गढ, अवनी परै उजास।
महि कोम निज मोद दे, पदमण सुजस प्रकास।।

हिरदै हिंदवां हार हिव, पाप आसी पिंड पास।
अंतस जद दे ऊरमा, पदमण सुजस प्रकास।।

गौरव देवण गहर मन, तोडण तन री तास।
सुणजो नितप्रत सरवणां, पदमण सुजस प्रकास।।

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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