पदमण सुजस प्रकाश

।।दोहा।।
पत सत राखी पदमणी, सत पथ बैय सधीर।
चावो कियो चित्तौडगढ, पूगल़ ऊजल़ पी’र।।
झल़ झाल़ां बैठी जबर, बप्पा नाम बधाव।
पूगल़ कीधो पदमणी, जादम सुजस जड़ाव।।

।।छंद रेंणकी।।
जस रो हद कोट जोड़ नह जिणरी,
रण चढिया अणमोड़ रह्या।
चावो चित्तौड़ पाट चक च्यारां,
वसुधा सतवाट घोड़ बह्या।
तांणी खग मोड़ तोड़ दल़ तुरकज,
कीरत कंठां कोड़ करै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।1

आयो बल़ पांण अलाऊ उरड़ै, ,
रूठ धरा घमसांण रच्यो।
विरड़ै किलमांण घांण कर बसती,
पावण पदमण खांन पच्यो।
अड़िया गहलोत आंण इकलिंग री,
कर खागां कड़पांण करै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।2

सोल़ै जद सहंस सिंघणी साथै,
सधर गात सिंणगार सजी।
पल़हल़ परभात साख सूरज री,
तन सैती सुखसात तजी।
ऊजल़ कर जात बात रख अवनी,
वाह मोत सखियात वरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।3

धधकी धूकार अगन धर धड़डै,
जोत भासंकर तेज जगी।
रमगी प्रमज़ोत जदै रजपूतण,
लपट वेग असमान लगी।
खप ऊभो हार सार बल़ खिलजी,
तप बधियो छत्रियांण तरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।4

हर हर हरसात टेर जद हिरदै,
केसरिया मेवाड़ किया।
लड़िया जोधार वीरत रा लाडा,
डग सीसोदां मरण दिया।
रंगी रतखाल़ सूरमां रणवट,
पूगी पंगी समँद परै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।5

राखण स्वाभिमान शान घर राखण,
जान हथेल़ी रखण जिकी।
पिंड रो अपमान पुरस पर परसण,
तण रखियो सनमान तिकी।
सुंदरता प्रतिमान मान रै साथै,
थपगी हिंदूस्थान थिरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।6

चंवरी बोह बैठ प्रीतम नै चितधर,
कंवरी घर सुखवास कियो।
झड़िया खग झाट जिकां धिन जोवो,
लार विजोगण वेस लियो।
(पण)पदमण कर पहल अगन मन प्यारी,
धुर बैठी रवि ध्यान धरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।7

मंडण महिल़ाव पदमणी पाधर,
दाव घाव अरियांण दियो।
साको वरताव कियो भड़ सारां,
कुल़-छल़ चाव उमाव कियो।
पनपै श्रद्ध भाव पाव ज्यां परसण,
जस जपियां तन ताव झरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।8

खपिया खुरसांण मुगल सह खपिया,
खपियो खिलजी आप खट्टां।
खपियो तैमूर चंगेजो खपियो,
झड़िया सूरी आप झट्टां।
सिरहर मेवाड़ पदमणी सांप्रत,
इकलिंग कायम आज अरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।9

पूगलगढ जलम लियो जिण पदमण,
जादम ऊजल़ कोम जठै।
बापा रै वंश वींदणी बणनै,
अणनै कीधो विमल़ अठै।
पावन कुल़ उभै किया धिन पदमण,
सांपड़ झाल़ां नार सिरै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।10

धिन – धिन मेवाड़ रतन धव धिन- धिन,
दिन-दिन पदमण तेज दिपै।
जादम सीसोद कियो धिन जोरां,
जन-जन थिरचक जाप जपै।
तीरथ चित्तौड़ पदमणी तपबल़,
कीरत गिरधरदान करै।
झूली सत झाल़ पदमणी जौहर,
भू धिन जाहर साख भरै।।11

।।छप्पय।।
कोम जदू निकलंक, भोम पूगल धिन भारी।
पुनपाल़ घर पेख, धीव पदमण तन धारी।
चावो गढ चित्तौड़, मांण अरियां दल़ मोड़ै।
सधर रतन सिरताज, जिकण संग पांणि जोड़ै
जौहरां झाल़ बैठी जबर, प्रण कियो धर पाल़ियो।
सासरै साथ पीहर सबल़, अवनी नार उजाल़ियो।।

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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