पटवारी री पुकार – कवि स्व. भंवर दान जी, झणकली

14 बरस पढ़ाई चाली खर्ची रकम करारी।
भाभोसा परसादी बांटे बण्यो पूत पटवारी।
पहली ठकराहत पटवारी, दूजी थानेदारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।1।।

दे ट्रेनिंग कयो हल्का माँ जाइन करो ड्यूटी जाके।
तीजे दिन तेहसीलदार सा इंस्पेक्सन करसी आके।
पैदल रस्ता हालत खस्ता ऊपर बस्ता भारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।2।।

पेंडो मील 25 चाल झांझर के थेट पुग जाणा।
बीच भील मेघा री बस्ती खोखा बोर खूब खाणा।
साहब की न हुई सरबरा (तो) डाँट पड़ेला भारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।3।।

ओके लीडर मीठ आकरी बड़का बोला बाबूजी।
गरजा करता गुस्सा आवे मांडे मनडो ढाबू जी ।
घाल सके वेतन माँ घोबो बिलबनता री बारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।4।।

नी दफ्तर फर्नीचर है नी लिखने तक री स्टेसनरी।
क्वाटर री तो बात काई पोखाली कोनी बेसन री।
बिन साधन लिस्टाँ बणवाणी नित री न्यारी न्यारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।5।।

आग लगो या टीडी आओ बाढ़ काल या बर्बादी।
जन्म मरण वोटर जनगणना मड़द किता कितरी मादी।
सभी महकमा सूचीयाँ मांगे भगदड़ करनी भारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।6।।

अवरा री करबा इन्क्वारी अधिकारी नित रा आवे।
महमानी परवारी माथे आधी तनखा ईयू जावे।
मारे माल छैल मुस्टंडा भरे डंड ब्रह्मचारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।7।।

सीयाले री सीत दडूकेे उनाळे री लूवाँ।
रातड़ली करसा री ढाणी जुवाँ रे संग सुंवा।
चौमासो री करण चालणा गाम गाम गीरदावरी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।8।।

खेत खेत माँ थाबा खाता काया पड़गी काली।
हाली री सोबत सूं सीख्यो अम्ल च्यार हथाली।
मेल जोल रखे उग्रानी लाखों माल गुजारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।9।।

मांग झुपडो ठाठ मचायो बिरखा सु भीगी बईया।
सरपंचा री रोज शिकायत सस्पेंट हो गए संईया।
हमके लज्यो हार गोरडी मेल संदेसा हारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।10।।

पचपन बरस कीया पूरा खसरो की करे खतौनी।
पांच गाम रे मालीक रे खड़वा ना खेतर कोनी।
बुढ़ापे माँ अणभणियोडा बच्चाँ री बेकारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।11।।

सदस् बणे पटवार संघ का चंदो खारो चुकाणो।
बिन रोया कुण हांचळ देवे ओ साँचो ओखाणो।
बारट भंवर दान के बंधी राखो राज कर्मचारी रे।
कोण सुणै पटवारी थारी नोकरड़ी सरकारी रे।।12।।

~~कवि स्व. भंवर दान जी, झणकली

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