प्रताप पच्चीसी

MaharanaPratap

।।दूहा।।
मुरदा सूता माल़ियां,अकबर वाल़ी ओट।
पौरस धरियो पातलै,कर झूंपड़ियां कोट।।1
धरा केक दे धीवड़्यां,दीन केक बण दास।
आतप मुगलां आपियो,भल़हल़ पातल भास।.2
वसुधा देयर बेटियां,धुर राखी चितधार।
ज्या़ंरो जग म़ें जोयलो,लधै न नाम लिगार।।3
रणबंकां संको रख्यो,बल़हठ रखी न बात।
बंका करतब विसरिया,जद भूली गुण जात।।4
सत रैगी दब स्याल़ियां,इण घुरियां आवाज।
पणधर राण प्रताप री,अखै अजै अगराज।।5
कांगापण में कालियां,मछर दियो कुल़ मेट।
पोह राखण परतापसी,अड़ियो करण अखेट।।6
मेवाड़ै धरियो मछर,अछर वरण अखियात।
तद आजादी ऊग तर,वसुधा पूगी बात।।7
खूटल नर सह खूटिया,मांचां पड़ सड़ मोत।
प्रिथी अमर परतापसी,झल़हल़ जसरी जोत।।8
अड़ियो मुगलां सूं अडर,चड़ियो चेतक पीठ।
खेतांरण खड़ियो खरो,रूकां लड़ियो रीठ।।10
कीरत खाटी रखण कुल़,ताटी भाखर ताण।
माटी कज लड़ियो मरद,घाटी में घमसाण।।11
जननायक भारत जयो,दिल सुध दाखै देस।
पातल पणधारी तनै ,अखै मुलक आदेस।।12
खूटल कई तो खोयग्या ,कुल़ री तीख तमाम।
(पण) पसरायो परतापसी,नवखँड जसरो नाम।।13
कण कण गूंजै कीरती,जण जण कंठां जोय।
पुहमी हिंद प्रताप री,करै न समवड़ कोय।।14
उत्तर नै दिखणाद इल़,पूरब नैं पिछमांण।
समवड़ सोरम सुजस री,जगत सरीखी जाण।।15
सुविधाभोगी संकिया,अकबर रै आपांण।
डांगां माथै डेरियो,रखियो पातल रांण।।16
भालो कर ठालो भुलो,भाखर चाकर भील।
विकट वाट विखमी समै,हिरदै अरियां हील।।17
आजादी तजदी अवर,रमण सदा सुखरास।
नाहर पातल निडर नर,तण तण सधरी त्रास।।18
मेट न सकियो मरद रो,साहस अकबरसाह।
हय गय थकनैं हालिया, रसा अया जिण राह।।19
ज्यां बल़ आयो जोपनैं,अकबर अठै अधीर।
पितल़ज हाल्यो पाछपग,तणिया पातल तीर।।20
मेदपाट जस मंडियो,खँडियो अकबर खार।
छतो धरम नह छंडियो, सधर करां धर सार।।21
बुई सीस बहलोल रै,खाय खड़ग तुझ खार।
कट कांधो अस कट्टियो, धसगी धरती धार।।22
धिन भाखर धिन बा धरा,रजवट राखण रीत।
पातल तैं पग पग करी,पहुमी वडी पवीत।।23
सब धरमां रो सेहरो,कहै मुखां हरकोय।
मरद कियो मेवाड़ नैं, जग में तीरथ जोय।।24
जात नात सबसूं जुदो,प्रा़तवाद रै पार।
सत वंदै भारत सकल़,धुरमन अंजस धार।।25
मर मानो अकबर मुवो,चरचा काय न चल्ल।
पहुमी रा़ण प्रताप री, गहर अमर आ गल्ल।।26

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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