राधा रुप रस चंद्रिका

🌺त्रिभंगी छंद🌺

आंख्या अणियाळी, काजळ वाळी ,काळी काळी, गाढाळी।
सावक हिरणाळी, रसिक रुपाळी, भोळी भाळी, नखराळी।
नित रहूं निहाळी, सरल सुखाळी, करुणावाळी, मन भावण।
राधा रस कामण, रुप रीझावण, दमकै दामण, जिम सावण॥1

मुख चंद अनुपम, पूरो पूनम,रे रस कूपम,सुंदरतम।
मन रा हरतौ तम, करतौ गम कम, जोत सरुपम, निरमलतम।
चमके है चम चम, जळहळ झळळम, नंदकुमारम, रीझावण।
राधा रस कामण, रूप रिझावण,दमकै दामण ,जिम सावण॥2

चंचळ मृगनैणी, सिर धर वैणी, वळ पिक बैणी, सुखदैणी।
सुन्दर मधुबैनी,चित हर लैणी, रे लाखेणी, उर रैणी।
रत रास रमैणी, आव अठैनी, दरसण दै नी, हरसा मन।
राधा रस कामण ,रूप रिझावण,दमकै दामण, जिम सावण॥3

कर कंकण खणणण, नुपूर रण झण, रुम झुम झणणण, छणणण छण।
मदमत गजगामण, सिर धर ओढण, सज धज बण ठण, मन आंगण।
बिचरै हर पल क्षण, आणंद उर घण, स्याम अकिंचन, चह चितवन।
राधा रस कामण, रूप रिझावण,दमकै दामण जिम सावण॥4

केहरि कटि लंकी, चाल अटंकी, चितवन बंकी, त्राटंकी।
कसियल कंचूकी, जरियन हूकी, लट बासूकी, नागूं की।
किंकण कटि हूं की, छं छं छमकी, सखी साम की, ह्रदय रमण।
राधा रस कामण ,रूप रिझावण,दमकै दामण ,जिम सावण॥5

दाडम सम दंती, हास हसंती, मन मुळकंती, विचरंती।
वपु धर वैजंती, अति सुभवंती, सखी सहंती, खेलंती।
हिय साम रहंती, घण गुणवंती, बेणु बजंती, रास रमण।
राधा रस कामण, रूप रिझावण,दमकै दामण,जिम सावण॥6

घण जोबन घेली, नवी नवेली, अति अलबेली, जँघ केळी।
करती रस केली, स्याम सहेली, जिम वनवेली, तरू भेळी।
सुरभि जिण फैली, सुख री हेली, भूधर चेली, वनरावन।
राधा रस कामण, रूप रिझावण,दमकै दामण, जिम सावण॥7

कटि पर धर मटकी, मग पनघट की, चलती अटकी, फिर ठिठकी।
जा जमना तटकी, बंसी बट की, नित नटखट की,राह तकी।
मुख सूं घूंघट की, लाजां झटकी, जा वर-नट की, सँग विहरण॥
राधा रस कामण, रूप रिझावण,दमकै दामण , जिम सावण॥8

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